एमबीबीएस और डेंटल पाठ्यक्रम शुल्क बढ़ोतरी का विरोध

- विद्यार्थियों और अभिभावकों ने की वापस लेने की मांग

By: Nikhil Kumar

Published: 15 Nov 2020, 09:26 PM IST

बेंगलूरु. विद्यार्थियों और अभिभावकों ने एमबीबीएस और डेंटल पाठ्यक्रम शुल्क बढ़ोतरी का विरोध किया है। सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। कोरोना काल में भी सरकार ने निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों को शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी है। अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (एआइडीएसओ) ने शुल्क बढ़ोतरी को विद्यार्थी विरोधी बताया है और मौजूदा फीस को किस्तों में बांटने की अपील की है ताकि अभिभावक आसानी से शुल्क का भुगतान कर सकें।

एआइडीएसओ के अनुसार कोरोना काल में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी सबसे ज्यादा महसूस हुई। चिकित्सा शिक्षा को किफायती बना चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के बजाए सरकार शुल्क बढ़ा विद्यार्थियों को इससे दूर कर रही है।

शुल्क बढ़ोतरी के बाद निजी कॉलेजों में सरकारी कोटे के विद्यार्थियों को 15 फीसदी ज्यादा शुल्क का भुगतान करना होगा जबकि अन्य विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा 25 फीसदी महंगी होगी। सरकारी कोटे के एमबीबीएस विद्यार्थी अब प्रति वर्ष 1.2 लाख और अन्य विद्यार्थी सालाना 9.8 लाख रुपए भरेंगे। वहीं, सरकारी कोटे पर निजी कॉलेजों में बीडीएस कर रहे विद्यार्थियों को सालाना 83,357 रुपए और अन्य विद्यार्थियों को सालाना 6.6 लाख रुपए भरने होंगे।

निजी कॉलेजों ने शुल्क बढ़ोतरी को समर्थन करते हुए इसे समय की मांग करार दिया है। शहर के एक निजी कॉलेज के अध्यक्ष ने बताया कि सरकार अपने चिकित्सकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन दे रही है। निजी मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक भी अब इसी तर्ज पर वेतन की मांग कर रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता और चिकित्सकों की सेवा बरकरार रखने के लिए मांग अनुसार वेतन देना जरूरी है। शुल्क बढ़ाए बिना यह संभव नहीं है।

Nikhil Kumar Reporting
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