कर्नाटक हाई कोर्ट के इस आदेश से कटने से बचे एक लाख पेड़

हाईकोर्ट का एनएच 4-ए चौड़ीकरण के लिए पेड़ों के काटने पर स्थगन

बेंगलूरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय के हालिया स्थगन आदेश के कारण करीब एक लाख पेड़ों पर कुल्हाड़ी नहीं चल पाएगा। कोर्ट ने बेलगावी और गोवा के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग ४-ए के चौड़ीकरण के लिए पेड़ काटने पर रोक लगाने का आदेश किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक संवदेनशील इलाकों से यह सडक़ गुजरेगी। सडक़ का १४ किलोमीटर हिस्सा डांडेली वन्यजीव अभयारण्य के घने जंगलों से होकर जाएगा जिसके लिए एक लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। हालांकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का दावा है कि वे इसके लिए २३ हजार पेड़ काटेंगे। वहीं याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पेड़ों की कटाई के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। प्राधिकरण का २३ हजार पेड़ों को काटने का दावा गलत है क्योंकि इस घने वन क्षेत्र में सडक़ चौड़ीकरण के लिए लगभग एक लाख पेड़ काट दिए जाएंगे।

याचिका में कहा गया इससे वन क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों हाथी, बाघ, तेंदुआ, किंग कोबरा सहित कई विलुप्त प्राय वन्यजीवों के जीवन पर खतरा बढ़ जाएगा। उनका प्राकृतिक आवास छिनेगा और सडक़ के कई हिस्सों के वन्यजीव कोरिडोर से गुजरने के कारण वन्यजीवों के जीवन पर आए दिन खतरा बना रहेगा।

मुख्य न्यायाधीश अभय ओक और न्यायाधीश् एसआर कृष्ण कुमार की डिविजन पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते स्थगन आदेश जारी किया। साथ ही, केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ३१ अक्टूबर तक बताए कि इस परियोजना के लिए अब तक कितने पेड़ काटे गए हैं और क्या पेड़ों को काटने के लिए अनुमति ली गई थी क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने बगैर अनुमति पेड़ काटने का दावा किया है।

जैव विविधता को खतरा
याचिका के अनुसार कर्नाटक में पश्चिमी घाट का इलाका अब अंतिम उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वनों में से एक है। पश्चिमी घाट एक जैव विविधता वाला पारिस्थितिक संवदेनशील क्षेत्र है और इसे यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है। घने जंगल वाला यह क्षेत्र दुर्लभ वनस्पतियां और लुप्तप्राय और संरक्षित श्रेणी वाली प्रजातियों से संबंधित हैं। सडक़ चौडक़रण से इसकी जैव विविधता पर खतरा बढ़ेगा।

बड़े पैमाने पर तबाही का दावा
याचिका में यह भी कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर वृक्षों की अवैज्ञानिक कटाई का मतलब होगा कि इस इलाके में दोनों राज्यों के आने वाले गांवों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन और तबाही होगी। याचिका में वन संरक्षण अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कथित अवैध सडक़ चौड़ीकरण को रोकने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

Priyadarshan Sharma
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