किसानों के आंसू निकाल रही प्याज

प्याज उत्पादक किसानों को प्याज रुलाने की तैयारी में है क्योंकि थोक बाजार में प्याज की कीमत १ रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है।

By: शंकर शर्मा

Published: 25 Nov 2018, 11:20 PM IST

बेंगलूरु. प्याज उत्पादक किसानों को प्याज रुलाने की तैयारी में है क्योंकि थोक बाजार में प्याज की कीमत १ रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। प्याज की कीमतों में पिछले एक सप्ताह के दौरान जोरदार गिरावट आई है। जहां एक सप्ताह पूर्व तक बेंगलूरु के थोक बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले प्रीमियम प्याज की कीमत १२ से १५ रुपए प्रति किग्रा थी, वहीं मंगलवार को कीमत १० रुपए प्रति किग्रा से कम हो गई जबकि गुरुवार को यह इसमें और ज्यादा कमी आ गई। वहीं राज्य के शेष भागों में स्थिति और ज्यादा गंभीर है और थोक बाजार में प्याज की कीमत १ रुपए प्रति किग्रा तक पहुंच गई है।


किसानों को रुलाने वाली प्याज की कीमतों के कारण पिछले दिनों बागलकोट में किसानों ने सडक़ पर प्याज फेंककर ‘रास्ता रोको’ आंदोलन किया था, वहीं हुब्बल्ली में भी इस प्रकार का प्रदर्शन देखा गया था। सोमवार को बेंगलूरु में कर्नाटक राज्य रैयत संघ के बैनर तले किसानों ने प्रदर्शन किया था और सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने और पूरे राज्य में प्याज क्रय केन्द्र खोलने की मांग की थी।


बेंगलूरु के थोक बाजार में उत्तर कर्नाटक और हैदराबाद कर्नाटक क्षेत्र के जिलों से बड़ी संख्या में प्याज बेचने किसान आते हैं। किसानों का कहना है कि प्याज के परिवहन पर उन्हें जो लागत आ रही है वह कीमत भी प्याज बेचने पर नहीं मिल रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को पहले से ही पता था कि प्याज की बड़ी खेप बाजारों में आएगी, ऐसे में किसान हित में पहले ही एमएसपी की घोषणा की जानी चाहिए थी लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।


सीएम का एमएसपी का भरोसा
मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि वे प्याज किसानों की परेशानियों से अवगत हुए हैं और सरकार जल्द ही प्याज के लिए एमएसपी की घोषणा करेगी। उन्होंने कहा, मैंने अधिकारियों को मौजूदा बाजार स्थिति पर रिपोर्ट देने को कहा है और उनसे उपयुक्त एमएसपी का सुझाव मांगा है।

आयात ने किया बेड़ा गर्क
इस वर्ष महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में प्याज की जोरदार पैदावार हुई है। कर्नाटक में भी किसानों की उपज अपेक्षा अनुरूप रही है। यह समय प्याज उखडऩे का है और पूरे देश के बाजार में बड़ी मात्रा में प्याज की आवक बनी हुई है। हालांकि जानकारों का मानना है कि प्याज की कीमत १ रुपए प्रति किग्रा तक पहुंचने के पीछे मूल कारण पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आयात हो रहा प्याज है। दिल्ली और पंजाब सहित उत्तर भारतीय राज्यों की मंडियों में पड़ोसी देशों से आयातित प्याज की भरमार है जिस कारण देश में उत्पादित प्याज की कीमत निचले स्तर पर आ गई है।

भंडारण के अभाव से समस्या
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कर्नाटक सहित पूरे देश में प्याज जैसे उत्पाद के लिए समुचित भंडारण व्यवस्था का अभाव है। इस कारण किसानों को मजबूरी में फसल को तुरंत बेचना होता है और बाजार में अचानक आपूर्ति बढने से कीमतें निचले स्तर पर पहुंच जाती है। प्याज जैसे उत्पाद को ज्यादा लम्बे समय तक नहीं रखा जा सकता है इसलिए उत्पादकों के पास प्याज बेचने की मजबूरी रहती है। वहीं अगर उचित भंडारण की व्यवस्था रहे तो बाजार में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है और दीर्घावधि में किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।

शंकर शर्मा
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