Breast milk,Karnataka : राज्य में 56.3 फीसदी बच्चों को ही मां का पहला दूध नसीब

Breast milk,Karnataka : राज्य में 56.3 फीसदी बच्चों को ही मां का पहला दूध नसीब

Nikhil Kumar | Updated: 02 Aug 2019, 04:24:03 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

जन्म के तुरंत बाद या ज्यादा से ज्यादा घंटे भर के भीतर infants को Breast Feeding कराया जाए तो Child Mortality Rate काफी कम हो सकती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की गत वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर Mother का पहला दूध भारत में महज 44 फीसदी बच्चों को ही मिल पाता है। वहीं सिर्फ 55 प्रतिशत महिलाएं ही बच्चे को जन्म के 6 महीने तक स्तनपान कराती हैं।
Karnataka में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार जन्म के एक घंटे के भीतर 56.3 फीसदी नवजातों को मां का Milk नसीब होता है, जबकि 54.2 शिशुओं को ही जन्म के छह माह तक यह दूध मिल पाता है। कुपोषण, बीमारी, समय पूर्व प्रसव, कम दूध बनना या बिल्कुल नहीं बनना, कामकाजी Women होने के कारण समय का अभाव आदि इन परिस्थितियों के बड़े कारक है।

स्तनपान सप्ताह विशेष : 'इंपावर पैरेन्ट्स, इनएबल ब्रेस्ट फीडिंग'

स्तनपान मां और शिशु दोनों के लिए आवश्यक
6 महीने तक सिर्फ मां का दूध ही दें
स्वास्थ्य विभाग फैलाएगा जागरूकता
निखिल कुमार

बेंगलूरु. जन्म के तुरंत बाद या ज्यादा से ज्यादा घंटे भर के भीतर नवजात को स्तनपान कराया जाए तो शिशु मृत्युदर काफी कम हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नवजात शिशु के लिए पीला, गाढ़ा मां का पहला दूध (कोलेस्ट्रम - colostrum) संपूर्ण आहार होता है। जिसे जन्म के तुरंत बच्चे को पिलाया जाना चाहिए। बच्चे को 6 माह तक नियमित रूप से स्तनपान कराते रहना चाहिए।

women And Child Welfare की गत वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला दूध भारत में महज 44 फीसदी बच्चों को ही मिल पाता है। वहीं सिर्फ 55 प्रतिशत महिलाएं ही बच्चे को जन्म के 6 महीने तक स्तनपान कराती हैं।
कर्नाटक में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार जन्म के एक घंटे के भीतर 56.3 फीसदी नवजातों को मां का दूध नसीब होता है, जबकि 54.2 शिशुओं को ही जन्म के छह माह तक यह दूध मिल पाता है। कुपोषण, बीमारी, समय पूर्व प्रसव, कम दूध बनना या बिल्कुल नहीं बनना, कामकाजी महिला होने के कारण समय का अभाव आदि इन परिस्थितियों के बड़े कारक है।

एंटीबॉडीज, लिपोप्रोटीन का सर्वश्रेष्ठ स्रोत

फोर्टिस अस्पताल में लेक्टेशन कंसलटेंट डॉ. जॉयसी जयसेलन बताती हैं कि मां के दूध में सभी पोषक तत्व सही अनुपात में होते हैं। जन्म के समय बच्चे की रोग प्रतिरोधक तंत्र निष्क्रिय होती है, मां के दूध से ही उसके शरीर में Antibodies और immunoglobulin पहुंचते हैं और बच्चें में रोगों से लडऩे का विकास होता है। मां का दूध लिपोप्रोटीन का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है।

दस्त, निमोनिया ग्रस्त 1 लाख बच्चों की मौत

शिशुओं को कुपोषण से बचाने व स्तनपान के महत्व को लेकर लागों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल अगस्त के पहले सप्ताह में स्तनपान दिवस का आयोजन किया जाता है। इस बार इसकी थीम 'Empower parents, enable breastfeeding' है। प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय में education, communication and information विभाग के संयुक्त निदेश डॉ. सुरेश शास्त्री ने बताया कि स्तनपान के अभाव के कारण दस्त और निमोनिया ग्रस्त एक लाख से भी ज्यादा शिशुओं की हर वर्ष मौत हो जाती है। दस्ते के 3.47 करोड़ और pneumonia के 24 लाख मामले देश में हर साल सामने आते हैं। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ताएं पहले छह माह तक नियमित रूप से हर उस घर में जाएंगी जहां शिशु का जन्म हुआ हो। सरकारी अस्पतालों में भी स्तनपान जागरूकता शिविर को आयोजन होगा।

स्तनपान को लेकर कई भ्रांतियां

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा दिवाकर के अनुसार स्तनपान को लेकर आधुनिक युग में कई भ्रांतियां हैं। कुछ महिलाएं फिगर खराब होने की चिंता में बच्चों को स्तनपान जैसे अनमोल उपहार से वंचित रख रही हैं। दूध पिलाने से वजन बढ़ेगा, Breast Cancer की संभावना होगी, फिगर खराब होगा ये सब भ्रामक है। वास्तव में स्तनपान करवाने से वजन नियंत्रित रहता है, स्तन कैंसर की संभावना घटती है। स्तनपान का कोई नकारात्मक पहलू है ही नहीं।

कामकाजी महिला क्या करें
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गायत्री कामत के अनुसार कई महिलाएं शिकायत करती हैं कि काम के कारन वे स्तनपान नहीं करा पाती है। ऐसी महिलाएं घर से बाहर जाने से पहले स्वयं का दूध निकालकर घर पर बच्चे के लिए रख सकती हैं। फ्रिज में 24 घंटे तक दूध सुरक्षित रहता है। आजकल कई कंपनियां अलग से बच्चे रखने की सुविधा देने लगी हैं। बीच-बीच में मां बच्चे को स्तनपान करवाती हैं।

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