10 दिन में दूसरी बार ओपीडी बंद

Shankar Sharma

Publish: Nov, 14 2017 09:30:49 (IST)

Bangalore, Karnataka, India
10 दिन में दूसरी बार ओपीडी बंद

महज 10 दिन में दूसरी बार निजी चिकित्सकों ने सोमवार को अस्पतालों का ओपीडी बंद कर कर दिया

बेंगलूरु. महज 10 दिन में दूसरी बार निजी चिकित्सकों ने सोमवार को अस्पतालों का ओपीडी बंद कर कर दिया। कर्नाटक निजी मेडिकल प्रतिष्ठान (केपीएमई) अधिनियम-2007 में प्रस्तावित संशोधन वापस लेने की मांग को लेकर प्रदेश के ४० हजार से भी ज्यादा निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक केंद्र व क्लिनिक में कामकाज ठप रहा।


मरीज अस्पतालों के बाहर इंतजार करते रहे पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। हालांकि आपात सेवाएं जारी थीं लेकिन इमरजेंसी वार्ड कनिष्ठ चिकित्सकों के हवाले थे। चिकित्सकों को जिन मरीजों की स्थिति आपात लगी, उनका उपचार किया, बाकी को सरकारी अस्पतालों में जाने पर मजबूर किया गया।

चिकित्सकों की कमी से कई गंभीर मरीजों को भी उपचार के लिए भटकना पड़ा। आईएमए ने हर हर हाल में आपात सेवाएं जारी रखने की बात कही थी। लेकिन कैंपेगौड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस का इमरजेंसी विभाग बंद रहा। अन्य जगहों से यहां आए मरीजों को भयंकर परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल से मैसूरु, मंड्या, कोप्पल, विजयपुरा, गदग सर्वाधिक प्रभावित रहे। ज्यादातर अस्पतालों के ओपीडी के बाहर तला था।


घेराव का था इरादा, पुलिस ने रोका
भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए), कर्नाटक के बैनर तले विभिन्न जिलों से २० हजार से भी ज्यादा चिकित्सक बेलगावी पहुंचे और रैलियां निकालीं। चिकित्सकों का इरादा सुवर्ण विधान सौधा को घेरकर सरकार पर दबाव बनाने का था लेकिन पुलिस ने रैली को भवन से करीब तीन किलोमीटर दूर ही रोक लिया।

सीएम के साथ वार्ता विफल, हड़ताल पर अड़े चिकित्सक
मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दोपहर करीब १२.३० बजे आईएमए, कर्नाटक के अध्यक्ष डॉ. एचएन रविंद्र को बैठक के लिए बुलावा भेजा। डॉ. रविंद्र की अगुवाई में आईएमए के एक प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री के साथ बैठक हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। बैठक के बाद डॉ. रविन्द्र ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति की स्थापना, चिकित्सकों को जेल भेजने और वित्तीय दंड के प्रावधान पर फिर गौर करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने मांगों को सुना।

ज्यादातर मांगों से उन्हें कोई खास परेशानी नहीं थी लेकिन मुख्यमंत्री ने आईएमए की मुख्य मांगों में से एक जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति के स्थापना के प्रस्ताव को विधेयक से हटाने पर कुछ नहीं कहा। डॉ. रविन्द्र ने बताया कि चिकित्सकों की हड़ताल जारी रहेगी। आईएमए के सामान्य निकाय बैठक में यह निर्णय लिया गया। वार्ता विफल होने के बाद क्या चिकित्सक मंगलवार से पूर्व घोषित भूख हड़ताल पर जाएंगे सवाल के जवाब में डॉ. रविन्द्र ने कहा कि इस पर मंगलवार को निर्णय लेंगे।


सरकारी योजनाओं को जोडऩा अन्याय
बैठक में शामिल कर्नाटक ऑर्थाेपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नित्यानंद राव ने मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी अस्पतालों पर सरकार की ओर से तय उपचार शुल्क पेशे के लिए नुकसानदेह होगा। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अनुसार ७६ फीसदी लोग उपचार के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। जबकि २४ फीसदी लोग ही सरकारी अस्पतालों में उपचार करा पाते हैं। उपचार शुल्क निर्धारित करने से कई छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम बंद हो जाएंगे। सरकारी योजनाओं को निजी चिकित्सकीय पेशे से जोडऩा अन्याय होगा।


गरीबों के हित में विधेयक
बैठक के दौरान सिद्धरामय्या ने चिकित्सकों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा, उनका इरादा चिकत्सकों को परेशान करने का नहीं है। सभी चिकित्सक बुरे नहीं होते हैं। गरीबों के हित में विधेयक लाया गया है। इसके लिए चिकित्सकों को हड़ताल करने की जरूरत नहीं है। विधेयक पर चर्चा होनी बाकी है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि विधेयक पेश करने से पहले चिकित्सकों की मांगों पर वे गौर करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री रमेश कुमार व अन्य संबंधित अधिकारियों से चर्चा के बाद ही आगे कोई कदम उठाएंगे। सरकार एक तरफा निर्णय नहीं लेगी। चिकित्सकों व अन्य हितधारकों को भी बात रखने का अवसर मिलेगा।

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