बीबीएमपी का चुनाव टलने की संभावना

हाल में संपन्न बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने बृहद बेंगलूरु महानगरपालिका (बीबीएमपी) की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक फेरबदल के लक्ष्य को लेकर लिए अलग कानून जारी करने के लिए संशोधित विधेयक मंजूरी के लिए पेश किया था। इस विधेयक का विपक्ष तथा सत्तासीन दल के कुछ सदस्यों ने विरोध करने के कारण यह विधेयक सदन की संयुक्त समिति के परामर्श के लिए भेजने का फैसला किया गया

बेंगलूरु.अब यह संयुक्त समिति इस संशोधित विधेयक का अध्ययन कर फिर इस विधेयक को दोनों सदनों में पारित किए जाने के बाद ही बीबीएमपी के चुनाव संभव है। इस प्रक्रिया में आठ दस माह लगने के कारण बीबीएमपी के चुनाव इस वर्ष सितम्बर माह में संभव नहीं होंगे। इससे पहले बीबीएमपी का प्रशासन भी कर्नाटक म्युनसिपल ऐक्ट 1976 के तहत चलाया जाता था। मुख्यमंत्री की ओर से राजस्व मंत्री आर अशोक ने बेंगलूरु शहर की आबादी तथा भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए इस महानगरपालिका के लिए ही बजट सत्र के दौरान विधानसभा में संशोधित विधेयक पेश किया था। लेकिन सदन के कई सदस्यों ने ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक को बगैर किसी बहस आनन-फानन में ध्वनिमत से पारित करने से इनकार करने के कारण राज्य सरकार की यह विधेयक पारित करने का प्रयास विफल रहा। राजस्व मंत्री चाहते थे की बीबीएमपी के महापौर तथा उपमहापौर का कार्यकाल मौजूदा एक वर्ष से 5 वर्षों तक विस्तारित किया जाए।इसके अलावा वार्ड समितियों को अधिक अधिकार मिले।बीबीएमपी के हर संभाग के लिए विशेष आयुक्त की नियुक्तियां,बीबीएमपी में शहर के बाहरी क्षेत्रों को सम्मिलित करना जैसे विभिन्न 29 संशोधन के साथ यह विधेयक बजट सत्र के अंतिम दिन पेश किया गया था।सत्तासीन दल के सदस्यों का विरोध जब यह विधेयक सदन में पेश किया तब विपक्ष कांग्रेस तथा जनता दल-एस ने बर्हिगमन किया था विपक्ष को सरकार की मंशा पर संदेह

विपक्ष कांग्रेस तथा जनता दल-एस को राज्य सरकार की मंशा पर संदेह है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामलिंगा रे्डडी के अनुसार सत्तासीन भाजपा ने एक सोची समझी रणनीति के तहत बजट सत्र के अंतिम दिन यह विधेयक सदन में पेश कर इसे संयुक्त सदन समिति को रेफर किए जाने जैसे हालांत बनाकर बीबीएमपी का चुनाव टालने का प्रयास किया है। है। यही भाजपा वास्तविक लक्ष्य था।

Sanjay Kulkarni Reporting
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