प्रशांत आत्मा थे आचार्य शुभचंद: ज्ञानमुनि

विजयनगर में धर्मचर्चा

By: Santosh kumar Pandey

Published: 01 Aug 2020, 08:26 PM IST

बेंगलूरु. ज्ञानमुनि ने कहा कि आत्मा को शुभत्व की ओर ले जाकर अक्षय आनन्द को प्राप्त करना हो तो क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी अशुभ विचारों को अपने जीवन से हटाना होगा। जयगच्छ के आचार्य शुभचंद का जीवन जनमानस को यही संदेश देता है।
ज्ञानमुनि ने विजयनगर में धर्मचर्चा में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि आचार्य शुभचंद का जीवन एक खुली किताब है। जो भी चाहे पढ़ लें। वे यश प्रसिद्धि से कोसों दूर थे। उनका कोई भी कार्य स्वान्त सुखाय, बहुजन हिताय होता था। वे जितने जयगच्छ में लोकप्रिय थे, उतने ही अन्य गच्छ की शाखाओं में भी लोकप्रिय थे। वे प्रपंच, पाखंड व प्रकाशन आदि से परे ही रहते थे। वे प्रशांत आत्मा थे। सरलता, सहजता की प्रतिमूर्ति थे। ऐसे गुणों के सागर आचार्य शुभचंद का अंतिम समय रायपुर में बीता।

रायपुर वर्षावास में उन्होंने देहलीला समवरण कर ली। अत्यंत सरल, सहज सादगीमय जीवन जीने वाले तथा सबसे मिलनसारिता उनके श्रेष्ठ गुण थे। इस कारण हजारों लोग उनको याद करते हैं और श्रद्धा रखते हैं।

महिला मंडल की कार्यशाला
बेंगलूरु. हनुमंतनगर तेरापंथ महिला मंडल ने मंजू दक की अध्यक्षता में स्वयं से शिखर तक कार्यशाला में ‘हमारा समाज हमारा दायित्व’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया। मुनि सुधारकर स्वामी का प्रेरणा पाथेय भी प्राप्त हुआ।
मुख्य वक्ता भावना कोठारी ने कहा कि समाज,परिवार और राष्ट्र के बीच की कड़ी है और अगर हमें राष्ट्र को मजबूत बनाना है तो पहले समाज को मजबूत बनाना जरूरी है।

Santosh kumar Pandey Desk
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