पंचामृत मस्तकाभिषेक किया

आचार्य पुष्पदंत सागर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय जन्म महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को चामुण्डराय मंडप में श्रुत स्कन्ध विधान व अतिप्राचीन चौबीसी का पंचामृत मस्तकाभिषेक किया गया।

By: Ram Naresh Gautam

Published: 30 Dec 2018, 08:50 PM IST

श्रवणबेलगोला. आचार्य पुष्पदंत सागर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय जन्म महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को चामुण्डराय मंडप में श्रुत स्कन्ध विधान व अतिप्राचीन चौबीसी का पंचामृत मस्तकाभिषेक किया गया।
इस अवसर पर मां जिनवाणी को रजत पालकी में विराजमान कर मंच पर लाया गया। साथ ही भगवान के समवसरण के समक्ष विराजमान कर कई साधु संतों के सान्निध्य में श्रुत स्कन्ध विधान हुआ। प्रज्ञासागर के निर्देशन एवं स्वस्ति चारुकीर्ति स्वामी के नेतृत्व में यह विधान किया गया। प्रात: काल की बेला में भंडार बसदि में विराजित विशाल चौबीसी में 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाओं का सप्तरंगी मस्तकाभिषेक 24 इंद्रों द्वारा किया गया।
ज्ञान के बिना आत्मा शून्य है
आचार्य पुष्पदंत सागर ने प्रवचन में कहा कि ज्ञान दिखता नहीं मगर सुनकर अनुभव होता है। पुष्प दिखता है मगर सुगंध का अनुभव होता है। जो साधु दूसरों का अनुकरण नहीं करते जमाना उन्हें जानता है। ज्ञान के बिना आत्मा शून्य और जड़ है। आत्मा के बिना शरीर मृत एवं मूल्यहीन है। आत्मा दिखती नहीं है परंतु उसका अनुभव होता है। जो दिखता है वह कमजोर है जो अनुभव से समझ में आता है वह बलशाली है। तन कमजोर है मन बलशाली है। गुरु की कृपा, करुणा और आज्ञापालन के बिना पुण्योपार्जन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मन हमारे ध्यान का केंद्र है और शाश्वत आत्मा हमारे प्रेम का लोकबिंदु है।

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