एचएएल जंक्शन पर कटे पेड़ों को देख भौचक रह गए लोग

  • उठा रहे सवाल, जानकारी क्यों नहीं दी गई
  • समिति के निर्देशानुसार काटे पेड़: bbmp

By: Santosh kumar Pandey

Published: 17 Mar 2021, 08:58 AM IST

बेंगलूरु. बेंगलूरु में ओल्ड एयरपोर्ट रोड और सुरंजन दास रोड जंक्शन (HAL Junction) के आसपास रहने वाले लोगों, राहगीरों और अन्य लोगों ने दस पेड़ों को जमीन पर धराशायी देखा तो चौंक गए।

यह कोई छोटे-मोटे पेड़ नहीं बल्कि पूर्ण विकसित पेड़ थे। निवासियों ने कहा कि जनता के विरोध के बावजूद उन्हें सूचित किए बिना अधिकारियों ने सप्ताहांत में पेड़ों की कटाई कर दी। वहीं, बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका का कहना है कि इलाके में एक अंडरपास के लिए कुल 25 पेड़ काटे जाएंगे।

पेड़ काटे जाने की सूचना मिलते ही मौके पर कुछ लोग इकट्ठा हो गए और विरोध करने लगे। उन्हीं में से एक महिला ने कहा कि लगभग दो साल पहले भी मानव श्रृंखला बनाकर लोग पेड़ काटे जाने का विरोध कर चुके हैं।

इसलिए काटे जा रहे हैं पेड़

वहीं बीबीएमपी के अनुसार इन पेड़ों को इसलिए काटा जा रहा है कि ताकि जंक्शन को सिगनल फ्री बनाया जा सके।
बीबीएमपी ने कहा कि उन्होंने पेड़ काटने के लिए विशेषज्ञ समिति के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया है। पेड़ों की कटाई को लेकर लोगों के विरोध के मद्देनजर कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। यह मामला बेंगलोर पर्यावरण ट्रस्ट (बीईटी) के ट्रस्टी देवरे डीटी द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के नाम पर बेंगलूरु और उसके आसपास के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

बीबीएमपी के उप वन संरक्षक रंगननाथ स्वामी के अनुसार तय प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही पेड़ों को काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमने शुरू में 48 पेड़ काटने की मांग की थी। लगभग एक सप्ताह पहले विशेषज्ञ समिति ने हमें 25 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। उनके सुझाव के आधार पर हमने 16 पेड़ों को बचाने के लिए अंडरपास में भी फेर-बदल किया है। काटे जाने वाले पेड़ों में से सात को हम अन्यत्र स्थानांतरित करेंगे।

हमें बताया क्यों नहीं

पेड़ों के काटे जाने का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि एक वरिष्ठ भारतीय वन सेवा अधिकारी के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ समिति ने क्षेत्र निरीक्षण के बाद इन पेड़ों को काटने की अनुमति दी है लेकिन उन्हें विशेषज्ञ समिति के निष्कर्षों के बारे में अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा कि उन्हें सूचित नहीं करना और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की जांच करने का अवसर न देना गैर-पारदर्शी और एकतरफा है।

अनुमति पर सवालिया निशान

एक वकील ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की जनता को जानकारी नहीं दी गई। हमें इस विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आपत्ति करने और सवाल उठाने का मौका नहीं दिया गया। हमें नहीं पता कि कब अनुमति मांगी गई और कब मंजूरी दी गई।
वहीं, बीबीएमपी अधिकारी के अनुसार विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को जनता के साथ साझा करना कानूनन आवश्यक नहीं है।

Santosh kumar Pandey Desk
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