बेंगलूरु. ऐतिहासिक विरासत संजोए विश्व प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा महोत्सव में हाथियों से युक्त शोभायात्रा 'जम्बो सवारी' मुख्य आकर्षण होती है। हर साल इस महोत्सव में शामिल होने वाले हाथियों का जंगल में शिविर से महल में आगमन और विदाई के समय वजन किया जाता है। आगमन के समय वजन के आधार पर हाथियों के लिए पौष्टिक आहार की गुणवत्ता और मात्रा तय की जाती है ताकि वे जंबो सवारी के दौरान लम्बा सफर तय करने और शोभायात्रा की रवानगी से पहले कई घंटे तक महल परिसर में प्रतीक्षा के लिए शारीरिक तौर पर तैयार हो सकें। आगमन के बाद मैसूरु महल परिसर में हाथियों का वजन किया गया। पिछले साल शोभायात्रा में 750 किलो वजनी स्वर्ण हौदा लेकर चलने वाला कैप्टन अर्जुन हाथी (5800 किलोग्राम) इस वर्ष भी अपने दल का सबसे वजनदार गजराज है। पिछले वर्ष दशहरा महोत्सव के बाद विदाई के समय अर्जुन का वजन 6110 किग्रा था। महोत्सव में इस बार स्वर्ण हौदा किस हाथी की पीठ पर सजेगा यह अभी तय नहीं है। पिछले वर्ष अर्जुन ने स्वर्ण हौदा उठाया था और इस बार भी उसी के नाम की चर्चा है। हालांकि अंतिम निर्णय अगले कुछ दिनों में वन विभाग और अन्य विभागों की आपसी चर्चा के बाद होगी।

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