धु्रवीकरण ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल

वोक्कालिगा बहुल इलाकों में जद ध ने उम्मीद से ज्यादा प्रदर्शन किया तो लिंगायत के सहारे भाजपा फिर से सत्ता के करीब पहुंच गई

By: Ram Naresh Gautam

Published: 16 May 2018, 05:30 PM IST

बेंगलूरु. राज्य की राजनीति में जटिल जातीय समीकरणों का उलझन एक बार फिर कांग्रेस के लिए भारी साबित हुआ। चुनाव परिणाम के प्रारंभिक आंकड़ों से साफ है कि जहां मत प्रतिशत बढऩे से भजापा की सीटें बढ़ी वहीं कांग्रेस की सीटें घट गई। माना जा रहा है कि ऐसा जातीय समीकरणों के परंपरागत आधार पर धु्रवीकरण के कारण हुआ। राज्य के दो प्रमुख समूहों- लिंगायत और वोक्कालिगा ने परंपरागत आधार पर मतदान किया और इसका फायदा भाजपा और जद ध को मिला। विश£ेषकों का कहना है कि लिंगायत मत भाजपा की झोली में गए तो वोक्कालिगाओं ने जद ध का साथ दिया और इससे कांग्रेस को नुकसान हुआ। वोक्कालिगा बहुल इलाकों में जद ध ने उम्मीद से ज्यादा प्रदर्शन किया तो लिंगायत के सहारे भाजपा फिर से सत्ता के करीब पहुंच गई।


कांग्रेस के वोट तो बढ़े, सीटें नहीं
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 222 सीटों के लिए हुए मतदान में कांग्रेस को 38 फीसदी मत मिले हैं जबकि भाजपा को 36.20 फीसदी मत मिले हैं। भाजपा की तुलना में 1.80 फीसदी मत मिलने के बावजूद कांग्रेस सीटों की संख्या के मामले में भाजपा से काफी पीछे रह गई। वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 36.6 फीसदी के साथ 122 सीटें मिली थी। वर्ष 2008 की तुलना में कांग्रेस का मत 2013 में 1.80 फीसदी बढऩे पर उसे 42 सीटों का फायदा हुआ था लेकिन इस बार 1.40 फीसदी मत ज्यादा मिलने के बाद उसकी 44 सीटें घट गई और पार्टी सत्ता से दूर हो गई।


बढ़े मतों से भाजपा को मिली ताकत
भाजपा को 2013 के चुनाव में बिखराव के कारण सिर्फ 19.9 फीसदी मत मिले थे और पार्टी सिर्फ 40 सीटों पर सिमट गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येड्डियूरप्पा ने भाजपा से अलग होकर अपनी अलग पार्टी कर्नाटक जनता पक्ष और बी.श्रीरामुलू ने बीएसआर कांग्रेस बना ली थी। दोनों पार्टियों को क्रमश : 6 और 4 सीटें मिली थी। येड्डियूरप्पा की पार्टी को 9.08 फीसदी मत मिले थे जबकि बीएसआर कांग्रेस को 2.07 फीसदी मत मिले थे। अगर भाजपा, केजेपी और बीएसआर कांग्रेस को कुल मिलाकार 31.5 फीसदी मत और 50 सीटें मिली थी। इसके विपरीत इस साल भाजपा को 36.20 फीसदी मत मिले हैं जो पिछले चुनाव में उसके कुल एकीकृत मत की तुलना में 4.70 ज्यादा मत मिले हैं और उसके सीटों की संख्या दुगुनी से ज्यादा हो गई। भाजपा को 2013 के चुनाव में 2008 की तुलना में 13.90 फीसदी मतों के नुकसान के साथ 70 सीटों का घाटा हुआ था।


जद ध के वोट घटे, सीटें नहीं
पिछले चुनाव की तुलना में जद ध के मतों में गिरावट आई है लेकिन उसके सीटों की संख्या में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। जद ध को पिछले चुनाव में 20.02 फीसदी मत के साथ 40 सीटें मिली थी जबकि इस बार उसे 1.72 फीसदी कम वोट मिले हैं लेकिन उसके सीटों की संख्या में सिर्फ 3 की गिरावट आई है। कांग्रेस के लिए बसपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, एमआईएम जैसे दलों का जद ध के साथ जाना भी भारी पड़ा। बसपा के कारण जद ध को दलित मतों का फायदा हुआ तो ओवैसी की पार्टी के कारण जद ध को अल्पसंख्यक मत भी मिले और कांग्रेस को इसके कारण नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा टिकट बंटवारे में सिद्धू को तरजीह और जनता में नाराजगी के बावजूद अधिकांश विधायकों को दुबारा टिकट देने का फैसला भी कांग्रेस को भरी पड़ा।

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