वायरस जैसे कण से होगा कैंसर का कारगर इलाज

आइआइएससी IISC के वैज्ञानिकों ने किया विकसित, कोशिकाओं की झिल्ली भेद पहुंचाएगा एंटीबॉडीज

By: Rajeev Mishra

Published: 24 May 2020, 10:54 AM IST

राजीव मिश्रा

बेंगलूरु.

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC) के वैज्ञानिकों ने वायरस जैसा एक ऐसा कण (Virus-Like Particles,VLPs) विकसित किया है जो कोशिकाओं की झिल्ली भेदकर उसके अंदर एंटीबॉडीज (antibodies) पहुंचा सकता है। अभी तक एंटीबॉडीज का इस्तेमाल कोशिकाओं की सतह पर मौजूद एंटीजेन (antigens) को मारने के लिए ही किया जाता है।

आइआइएससी ने कहा है कि रोगग्रस्त कोशिकाओं के इलाज में मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज काफी कारगर होते हैं लेकिन, यह कोशिकाओं के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते। इसलिए एंटीबॉडीज के जरिए कोशिकाओं की सतह पर मौजूद एंटीजेन को ही टारगेट किया जाता है। लेकिन, वायरस जैसे इस कण के विकास से भविष्य में इसका इस्तेमाल कोशिकाओं के भीतर एंटीबॉडी पहुंचाने वाले कैरियर (वाहक) के रूप में होगा। इससे कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारगर तरीके से इलाज हो सकता है।

वायरस जैसे कण से होगा कैंसर का कारगर इलाज

तीन दशक के शोध का नतीजा

भारतीय विज्ञान संस्थान में जैव रसायन विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक (NASI) प्रोफेसर एचएस सावित्री ने 'पत्रिका' को बताया कि यह लगभग 30 वर्षों के शोध का नतीजा है। उन्होंने बताया कि कोशिकाओं के अंदर पहुंचने के लिए एक ऐसा वाहक चाहिए जो कोशिका झिल्ली को भेद सके। वायरस जैसे कण ऐसा कर सकते हैं। उसी को ध्यान में रखकर इसे विकसित किया गया है। इससे कोशिकाओं के अंदर एंटीबॉडीज पहुंचाया जा सकता है। इसे पेपर वेन बैंडिंग वायरस (Pepper vein banding virus, PVBV) नाम दिया गया है।

मिर्च के पौधे से निकाला

एचएस सावित्री ने बताया कि इसे काली मिर्च के पौधे से वर्षों पहले अलग किया गया था। यह मिर्च के पौधे को काफी नुकसान पहुंचाता है। लेकिन, हमने केवल उसकी बाह्य संरचना का ही उपयोग किया है। इस वायरस में किसी भी तरह का कोई आनुवांशिक गुण नहीं है और यह किसी तरह का कोई संक्रमण पैदा नहीं कर सकता। इसका केवल एक वाहक के तौर पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है। मूलत: पौधे से बना यह वायरस जैसा कण सभी स्तनधारी प्राणियों की कोशिकाओं में प्रवेश कर सकता है। ये वायरस एंटीबॉडीज लेकर कोशिकाओं के बाहर जमा होंगे और भीतर प्रवेश कर जाएंगे। कोशिकाओं के भीतर एंटीबॉडीज कार्यशील होने से लक्षित एंटीजेन मारे जाएंगे। एंटीबॉडीज लेकर कोशिकाओं के भीतर जा रहे इन कणों को ट्रैक भी किया जा सकता है कि वे एंटीबॉडीज को सही जगह पहुंचा रहे हैं या नहीं।

चिकित्सा के क्षत्र में काफी उपयोगी

प्रोफेसर सावित्री ने बताया कि कैंसर की कोशिकाओं में एक विशेष प्रकार का प्रोटीन होता है। अगर इस वायरस कण के जरिए एंटीबॉडीज उनके अंदर पहुंचा दी जाए तो बड़ी संख्या में ऐसी कोशिकाओं को बनने से रोका जा सकता है। अभी इसपर शोध होना है लेकिन आने वाले दिनों में यह खोज चिकित्सा जगत में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। लंबे शोध के बाद पिछले कुछ वर्षों से हम उसके एप्लीकेशन पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही इसका लाभ मानव समाज को मिलेगा।

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Rajeev Mishra Reporting
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