रेमडेसिविर से ज्यादा प्रभावी प्लाज्मा थेरेपी

- पांच गुना बढ़ी प्लाज्मा की मांग, नहीं मिल रहे डोनर
- टीकाकरण के 28 दिन बाद ही संक्रमण से उबरे मरीज कर सकेंगे दान

By: Nikhil Kumar

Updated: 04 May 2021, 09:28 PM IST

बेंगलूरु. कोविड के बढ़ते गंभीर मरीजों के बीच राज्य में प्लाज्मा की मांग बढ़ी है। चिकित्सकों ने प्लाज्मा थेरेपी को रेमडेसिविर इंजेक्शन से ज्यादा प्रभावी (plasma therapy is more effective than remdesivir) बताया है। लेकिन, मांग के अनुसार दाता नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर प्लाज्मा बैंक प्लाज्मा की कमी से जूझ रहे हैं।

अधिकृत प्लाज्मा बैंक (Plasma Bank) संचालकों का कहना कि कोविड के गंभीर मरीजों के लिए कई चिकित्सक प्लाज्मा थेरेपी की सलाह दे रहे हैं। परिजन प्लाज्मा के लिए भटक रहे हैं। कोविड के 2500 से ज्यादा मरीज आइसीयू में भर्ती हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज गंभीर हैं। प्लाज्मा थेरेपी से कई मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है। कोविड से उबरे मरीज अपेक्षा अनुसार प्लाज्मा दान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।

राज्य समर्थित एचसीजी प्लाज्मा बैंक के प्रमुख डॉ. यूएस विशाल राव ने बताया कि प्लाज्मा की मांग करीब पांच गुना बढ़ी है। हर दिन करीब 25 मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत पड़ती है। लेकिन, तीन से पांच मरीजों को ही प्लाज्मा नसीब हैं। जागरूकता के अभाव में भी कई लोग प्लाज्मा नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन से ज्यादा प्रभावी है प्लाज्मा थेरेपी। कई अंतरराष्ट्रीय निकाय प्लाज्मा थेरेपी का सहारा ले रहे हैं। मायो क्लिनिक के अध्ययन के अनुसार प्लाज्मा थेरेपी 51 फीसदी तक मृत्यु दर कम करने में सक्षम है। गत वर्ष 60 फीसदी मरीज प्लाज्मा थेरेपी से लाभान्वित हुए। कोविड से उबरा हर मरीज दो लोगों की जान बचा सकता है। मरीज को ऑक्सीजन पर रखने के तीन दिन के भीतर प्लाज्मा थेरेपी हो तो कई मरीजों को बचाया जा सकता है।

लोगों से प्लाज्मा दान करने की अपील करते हुए डॉ. राव ने कहा कि कोविड से उबरा मरीज 28 दिनों के बाद प्लाज्मा दान कर सकता है। स्वस्थ हुए जिन लोगों ने कोरोना का टीका लगवाया है वे टीकाकरण के 28 दिन बाद प्लाज्मा दान कर सकते हैं।

डॉ. राव के अनुसार डोनर से प्लाज्मा लेने के बाद कोरोना वायरस के खिलाफ तैयार एंटीबॉडी लेवल मापना जरूरी है। प्लाज्मा में इम्यूनोग्लोबुलिन जी (आइजी) अनुमापांक (टाइटर) की जानकारी जरूरी है। टाइटर एक इकाई है। इसके जरिए कोविड से उबरने वाले के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी की मात्रा का आकलन किया जाता है जो बेहद जरूरी है। इसी के आधार पर संक्रमित मरीज के लिए प्लाज्मा की डोज तय होती है। लेवल मॉडरेट से हाई हो तभी प्लाज्मा थेरेपी का असर होगा। कोविड से उबरे कई मरीजों में अपेक्षा अनुसार एंटीबॉडी नहीं है। एक माह पहले संक्रमण से उबरे लोगों में थेरेपी के लिए पर्याप्त एंटीबॉडी होती है। ऐसा एक मरीज दो लोगों की जिंदगी बचा सकता है।

Nikhil Kumar Reporting
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