प्रतिदिन एक-एक त्याग का संकल्प करें

शूले स्थानक में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 26 Aug 2020, 11:30 PM IST

बेंगलूरु. अशोकनगर शूले जैन स्थानक में विराजित डॉ. समकित मुनि ने 32 शुभ योग संग्रह के सूत्रों पर विवेचन करते हुए कहा कि विसर्जन करने की कला सीखें। जो वस्तु काम की नहीं उसे रख कर कोई फायदा नहीं।

मुनि ने कहा कि यदि व्यर्थ की वस्तु को छोडऩे में जोर लगता है तो जब देह को छोडऩे का वक्त आएगा तो उसका त्याग कैसे होगा? त्याग का प्रतिदिन अभ्यास करते रहने से अंत समय में देह त्याग करने में समस्या नहीं आएगी। प्रतिदिन एक-एक त्याग का संकल्प करें। कभी क्रोध लोभ तो कभी स्वार्थ का विसर्जन करें। विसर्जन की भावना हमारे पुण्य प्रकृति के पुदगलों को शक्तिमान बनाती है जिससे ना केवल हमारे सामने बैठे व्यक्ति में परिवर्तन आता है बल्कि आसपास का वातावरण भी हमारे अनुकूल बनता है।

जो विसर्जन नहीं करता, आसक्ति में जकड़ा रहता है वह भविष्य में सांप अथवा चूहा बनता है। विसर्जन करना आ जाता है तो सर्जन स्वयं ही होता रहता है। जो हमारे काम का नहीं है उसे व्यर्थ में बर्बाद ना कर के किसी ऐसे व्यक्ति को वो वस्तु दे दें जिसे वह उसका उपयोग कर सकें। सती चेलना का चरित्र सुनाते हुए मुनि ने कहा चित्र ऐसे देखो जिससे हमारा चरित्र सुंदर बने।

चित्र शालीनता से परिपूर्ण होने चाहिए क्योंकि चित्र का हमारे चित पर प्रभाव पड़ता है। चेहरे की सुंदरता तभी सार्थक होती है जब हमारा चारित्र सुंदर बनता है। एक इंद्रिय का असंयम सभी इंद्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता है। प्रचार प्रसार मंत्री प्रेम कुमार कोठारी ने बताया कि इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष किरणराज मरलेचा, अरविंद कोठारी, अनिल कोठारी, सुरेश खींचा, मोहनलाल चोपड़ा आदि उपस्थित थे।

Santosh kumar Pandey Desk
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