दो साल में कच्चे तेल का आयात 10% कम करने का लक्ष्य, जैव ईंधन को देंगे बढ़ावा : मोदी

बेंगलूरु में पांच दिवसीय 107 वीं विज्ञान कांग्रेस प्रारंभ

By: Rajeev Mishra

Updated: 03 Jan 2020, 11:23 AM IST

बेंगलूरु. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में पांच दिवसीय 107वीं विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। बेंगलूरु में नौवीं बार विज्ञान कांग्रेस का आयोजन हो रहा है।
विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि खुश हूं कि नए साल और नए दशक का पहला कार्यक्रम विज्ञान और नवोन्मेष से जुड़ा है। बेंगलूरु गार्डन सिटी से स्टार्ट अप हब के रुप में उभरा है। हम वर्ष 2020 की विज्ञान आधारित विकास से करें। खुश हूं कि नवोन्मेष सूचकांक में भारत की रैंकिंग सुधरी है और अब देश 52वें स्थान पर है। इनोवेट, पेटेंट, प्रोड्यूस, प्रोस्पर का मंत्र लेकर चलें युवा वैज्ञानिक।
मोदी ने कहा कि भारत में समाज को जोड़ने में विज्ञान की अहम भूमिका है। सरकार से आम आदमी का जुड़ाव बढ़ा है। पिछले पांच साल में स्वच्छ भारत से आयुष्मान भारत तक की सफल डिलीवरी में हमारी प्रतिबद्धता है तो गुड गवरेनेन्स में विज्ञान और प्रोद्योगकी की भूमिका रही।
जियो टैगिंग से परियोजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं, ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाना है। जल-जीवन मिशन की ताकत भी प्रौद्योगिकी है। सिंगल प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया है। इसका विकल्प आपको देना है। मोदी ने कहा कि आप जो समाधान देंगे उसे लघु उद्योग आगे बढ़ाएंगे। इससे पर्यावरण बचेगा। वर्ष 2022 तक कच्चे तेल का आयात 10 फीसदी कम करना है,इससे जैव ईंधन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं बनती हैं। यह 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने में अहम योगदान होगा। प्रौद्योगिकी आम आदमी और सरकार के बीच की कड़ी है। यह निष्पक्ष होता है।



इससे पहले राÓय के मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने कहा कि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन गर्व की बात है। कर्नाटक विज्ञान का बड़ा है। कर्नाटक विज्ञान और अनुसंधान परिषद का गठन करने वाले अग्रणी राÓयों में है।


इस बार का थीम है-ग्रामीण विकास: विज्ञान एवं प्रद्योगिकी।
7 जनवरी तक चलने वाले इस विज्ञान कांग्रेस में कृषि क्षेत्र में हुए नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे। शोध पत्र भी पेश होंगे। देश भर के 150 एक्जीबीटर्स अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
नोबल पुरस्कार विजेता भी सत्र को संबोधित करेंगे।
इसरो, डीआरडीओ, सीएसआईआर, डीएई के पैवेलियन भी लगे हैं।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस का पहला सत्र वर्ष 1914 में 15-17 जनवरी आयोजित हुआ था।पहले विज्ञान सत्र की अध्यक्षता तत्कालीन कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति आशुतोष मुखर्जी ने किया था।पहले विज्ञान कांग्रेस में कुल 35 शोध पत्र पेश हुए थे। उस समय विज्ञान कांग्रेस के 105 सदस्य थे जो आज 16 हजार से अधिक हो चुके हैं।
विज्ञान कांग्रेस का शताब्दी समारोह 2013 में कोलकाता में हुआ। अध्यक्षता तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने की।
यह विज्ञान कांग्रेस का 107 वां अधिवेशन है। कर्नाटक में इससे पहले वर्ष 2016 में मैसूरु में विज्ञान कांग्रेस का आयोजन हुआ था।

देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में गांवों की अहम भूमिका है। नीति निर्माण के केंद्र में ग्रामीण विकास होता है। आज भी 58 फीसदी कार्यबल और 70 फीसदी आबादी कृषि और इससे सम्बन्धित सेवाओं में रोजगार पाए हैं। आजादी के बाद से विज्ञान विकास का केंद्र शहरी क्षेत्र रहे हैं। चाहे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान हो या उनकी प्रयोगशालाओं से निकले इनोवेशन। लाभ शहरी क्षेत्रों को मिला है। इसे ग्रामीण क्षेत्रों तक कैसे पहुंचाएं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार ग्रामीण विकास में विज्ञान की भूमिका चर्चा होगी।
1947 से लेकर 2020 तक सिर्फ दो बार विज्ञान कांग्रेस में पीएम नहीं आए। उनमे से एक बार ऐसा 1971 में हुआ।
देश के विकास में विज्ञान कांग्रेस की भूमिका अहम है। भारत आज शोध पत्रों के प्रकाशन में 6 ठे स्थान पर है।
मौलिक अनुसन्धान में जीनसीएआर विश्व में 7 वें स्थान पर आ गया है।

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Rajeev Mishra Reporting
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