सावरकर का नाम क्यों? बेंगलूरु में फ्लाई ओवर के नामकरण पर सियासी घमासान, टला उद्घाटन

विपक्ष ने खेला क्षेत्रवाद का कार्ड, भाजपा को घेरा

 

By: Jeevendra Jha

Updated: 28 May 2020, 02:08 AM IST

बेंगलूरु. विनायक दामोदर सावरकर के नाम पर सियासी घमासान नई बात नहीं है। कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण के बीच भी कर्नाटक की राजनीति में सावरकर को लेकर उबाल आ गया। बेंगलूरु शहर के यलहंका इलाके में में एक नवनिर्मित फ्लाई ओवर का नामकरण वीर सावरकर के नाम पर करने को लेकर उपजे विवाद के कारण प्रस्तावित उद्घाटन समारोह रद्द कर दिया गया। मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पाा को गुरुवार को इस फ्लाई ओवर का उद्घाटन करना था। उनके राजनीतिक सचिव व यलहंका के विधायक एस.आर.विश्वनाथ को कार्यक्रम की अध्यक्षता करनी थी। इसके लिए बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका की ओर से दो बार आमंत्रण पत्र भी जारी किया जा चुका था लेकिन विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बाद बुधवार शाम कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। हालांकि, ३४ करोड़ रुपए की लगात से बने फ्लाई ओवर के नामकरण का फैसला तीन महीने पहले पालिका की परिषद की बैठक में लिया गया था।

पालिका ने बुधवार सुबह में फ्लाई ओवर के उद्घाटन समारोह के लिए आमंत्रण पत्र जारी था। इसमें सावरकर का नाम था। इसके बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्ष ने क्षेत्रवाद का कार्ड भी खेला और इसे स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान करार दिया। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों- जद एस नेता एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस नेता सिद्धरामय्या ने सावरकर के नाम पर नामकरण का विरोध किया। इसके बाद में पालिका ने नया आमंत्रण कार्ड जारी किया जिसमें सिर्फ फ्लाई ओवर के उद्घाटन का जिक्र था। इसमें वीर सावरकर के नाम का उल्लेख नहीं था लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं था। दोनों पक्षों के नेताओं के बीच इसे लेकर बयानबाजी भी हुई। विवाद नहीं थमता देख कार्यक्रम को ही रद्द कर दिया।

कर्नाटक के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर हो : सिद्धरामय्या
विधानसभा में विपक्ष के नेता ने ट्वीट कर कहा कि सावरकर के नाम पर फ्लाई ओवर का नामकरण यहां के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। सिद्धरामय्या ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस फैसले को रद्द कर राज्य के किसी स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर करना चाहिए। सिद्धरामय्या ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सावरकर के नाम पर नामकरण करने से इस हकीकत की पुष्टि हो जाती है कि राज्य का शासन कोई निर्वाचित सरकार नहीं चला रही है बल्कि पर्दे के पीछे छिपे लोग यह काम कर रहे हैं। उन्होंने येडियूरप्पा से सवाल किया कि क्या वे इस तरह के जनविरोधी निर्णय करने के लिए ही विपक्षी दलों से सहयोग मांगते हैं?

यहां सवारकर के नाम का उपयोग तार्किक नहीं : कुमारस्वामी
कुमारस्वामी ने भी सरकार पर निशाना साधा। कुमारस्वामी ने भी विरोध करते हुए कहा कि क्या किसी दूसरे राज्य में कर्नाटक के स्वतंत्रता सेनानी के नाम का इस तरह से इस्तेमाल किया गया है? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लेना चाहिए। इस फ्लाई ओवर को सावरकर का नाम देना देश के विकास में योगदान देने वालों का अपमान है। उन्होंने कहा कि क्या देश के अन्य राज्यों में कर्नाटक के महापुरुषों के नाम पर नामकरण किया जाता है? तो कर्नाटक में किसी फ्लाईओवर को सावरकर का नाम देना तार्किक नहीं है। हालांकि,विपक्ष पर हमला करने में भाजपा के नेता भी पीछे नहीं रहे। स्थानीय विधायक विश्वनाथ से लेकर केंद्रीय प्रह्लाद जोशी ने भी दोनों विपाी नेताओं की आलोचना की।

फरवरी में पालिका ने पारित किया था प्रस्ताव : महापौर
हालांकि, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी घमासान के बीच महापौर एम गौतम कुमार ने कहा कि फ्लाई ओवर के नामकरण के बारे में निर्णय फरवरी में पालिका परिषद की बैठक में लिया गया था। महापौर ने कहा कि जब भी पालिका के क्षेत्र में किसी व्यक्ति के नाम पर नामकरण का प्रस्ताव आता है तो उस पर पालिका परिषद में चर्चा होती है। इसके अलावा आम लोगों से भी राय मांगी जाती है। इस मामले में भी पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। बताया जाता है कि २५ फरवरी को पालिका परिषद ने यलहंका उपनगर मेें वीर सावरकर के नाम पर फ्लाई ओवर के नामकरण के प्र्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।

पालिका आयुक्त बीएच अनिल कुमार ने कहा कि नामकरण के लिए पालिका परिषद ने प्रस्ताव पारित किया था लेकिन अभी तक सरकार ने इसे अनुमोदित नहीं किया है। पालिका सत्तारुढ़ भाजपा के नेता के.ए. मुनींद्र कुमार ने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस प्रस्ताव को अनुमोदित कर देगी। उन्होंने कहा कि सबको सावरकार के योगदान के बारे मेें पता है, विपक्ष के विरोध से हम चिंतित नहीं है। उन्होंने कहा कि नामकरण का प्रस्ताव सबसे पहले यलहंका सैटेलाइट टाउन के पार्षद सतीश एम ने रखा था।

पहले भी हुए नामकरण को लेकर विवाद
गौरतलब है कि नामकरण और पुनर्नामकरण को लेकर पालिका को पहली बार विरोध का सामना नहीं करना पड़ रहा है। कुछ समय पहले चामराजपेट में अलूर वेंकट राव रोड (पहले अल्बर्ट विक्टर रोड) का नाम बदलकर टीपू सुल्तान समर पैलेस रोड करने के प्रस्ताव पर भी विवाद हुआ था। पूर्व परिषद ने इस प्रस्ताव को पारित किया था लेकिन मौजूदा परिषद ने इसे वापस ले लिया।

Jeevendra Jha
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