प्रमाद में उलझे तो आत्मजागृति संभव नहीं: डॉ. महाप्रज्ञा

श्रीरंगपट्टण में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 02 Sep 2020, 11:25 PM IST

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टण के दिवाकर मिश्री गुरु राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता का चातुर्मास जारी है। साध्वी डॉ. महाप्रज्ञा ने कहा कि पुण्योदय से मानव जन्म पा लिया, उत्तम धर्म भी पाया।

यह सभी सुंदर योग बने कि हम सब हमारी मुक्तिनगर की यात्रा जारी रखें। परंतु हमारे इस प्रोग्रेस में, प्रयत्न में, यात्रा में यदि सब से बड़ी कोई बाधा है तो वह है प्रमाद की। हमें सब ज्ञात है कि हमें त्याग करना है, तपस्या करनी है, धर्म का, प्रभु आज्ञा के पालन द्वारा, आचरण करना है परंतु एक प्रमाद,आलस्य हमें पीछे कर देता है, हरा देता है और हमारी प्रगति, हमारा उत्थान रुक सा जाता है।

साध्वी ने कहा कि हमें अब जागृत होना ही होगा और अप्रमत्तता जैसे सद्गुण को अपनाना ही होगा। अप्रमतत्ता अर्थात प्रमाद का त्याग। आलस्य का त्याग। जहां तक मनुष्य प्रमाद में डूबा हुआ होता है तब तक आत्म जागृति संभव नहीं और इस कारण मनुष्य अपना कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता।

आलस्य को छोड़ कर वह खड़ा होगा तो ही आगे बढ़ सकता है। जिनको मानव जीवन की सार्थकता की क़ीमत होती है वो ही सच्चा पुरुषार्थ कर सकते हैं।

Santosh kumar Pandey Desk
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