दृष्टिकोण सकारात्मक हो तो समस्याएं समाप्त: देवेंद्रसागर

राजाजीनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Published: 07 Jul 2020, 04:48 PM IST

बेंगलूरु. मन वास्तव में हमारे प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष अनुभवों का संग्रह मात्र है। हमारा व्यक्तित्व वास्तव में हमारे इन्हीं अनुभवों और सोच का परिणाम है। यह बात आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने कही।

उन्होंने कहा कि हम अपने जीवन में जो कुछ भी अच्छा या बुरा सीखते हैं, वे सब हमारे मन में संचित हो जाते हैं। जीवन में सीखे हुए जो अनुभव कभी काम में नहीं आते, वे मन में बहुत गहरे दफन हो जाते हैं।

उनमें से कुछ अनुभव ज्यादा गहरे में दफन होकर हमारे अचेतन मन का हिस्सा बन जाते हैं, तो कुछ अनुभव कम गहरे में दफन होकर हमारे अवचेतन मन का हिस्सा बन जाते हैं। जब यही अनुभव हमारे चेतन मन में आते हैं, अथवा सप्रयास चेतन मन में लाए जाते हैं, तो हमारे मन की बात बन जाते हैं।

अब यह जरूरी तो नहीं कि हमारे सभी अनुभव अच्छे अथवा उपयोगी ही हों। कुछ अनुभव अच्छे हो सकते हैं, तो कुछ बुरे भी, लेकिन ये सभी अनुभव हमारे मन की संपत्ति बन जाते हैं। हमें अधिक ज्ञान अथवा काल्पनिक भावुकता की नहीं, बल्कि बुद्धि का सदुपयोग करने की आवश्यकता होती है, जो विवेक द्वारा ही संभव है। हमारे मन में जहां अधिकांश कूड़ा-कचरा भरा होता है, उसमें से उपयोगी विचार कैसे निकालें- यह बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। यहां हमें विवेकशील होने की जरूरत है।

इसके लिए जरूरी है कि हम अपना दृष्टिकोण सकारात्मक बनाएं। यदि हमारी सोच पूरी तरह सकारात्मक हो जाए, तो सारी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। लेकिन अक्सर ऐसा संभव नहीं होता। इसीलिए विवेक अनिवार्य है। विवेक के द्वारा ही उपयोगी व अनुपयोगी विचारों अथवा कार्यों में भेद किया जा सकता है।

Santosh kumar Pandey Desk
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