जन्मदिन पर याद किए गए कुवेम्पू

राज्य के विभिन्न स्थानों पर शनिवार को ज्ञानपीठ पुरस्कृत साहित्यकार के.वी. पुट्टप्पा (कुवेम्पू) का 114वां जन्मदिवस मनाया गया।

By: शंकर शर्मा

Published: 30 Dec 2018, 10:58 PM IST

बेंगलूरु. राज्य के विभिन्न स्थानों पर शनिवार को ज्ञानपीठ पुरस्कृत साहित्यकार के.वी. पुट्टप्पा (कुवेम्पू) का 114वां जन्मदिवस मनाया गया।

इस अवसर पर उनकी साहित्यिक रचनाओं को लेकर विचार संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1904 में शिवमोग्गा जिले के कुप्पली गांव में एक संपन्न परिवार में जन्म लेने वाले पुट्प्पा को रामायण दर्शन रचना के लिए वर्ष 1968 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार प्राप्त करनेवाले वह पहले कन्नड़ साहित्यकार थे।


उनकी रचना ‘जय भारत जननीय तनुजाते जय हे कर्नाटक माते’ गीत को कर्नाटक के नाडगीते (राज्य का गीत) के रूप में मान्यता मिली है। सभी सरकारी समारोह की शुरुआत इसी गीत से की जाती है। उनकी दूसरी रचना ‘हुलूवा योगी नोडअल्ली’ इस गीत को राज्य सरकार ने किसान गीत के रूप में मान्यता दी है।


महोत्सव : जिनवाणी जग मैया मरण दु:ख मेट दे...
श्रवणबेलगोला. आचार्य पुष्पदंत सागर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय जन्म महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को चामुण्डराय मंडप में श्रुत स्कन्ध विधान व अतिप्राचीन चौबीसी का पंचामृत मस्तकाभिषेक किया गया।


इस अवसर पर मां जिनवाणी को रजत पालकी में विराजमान कर मंच पर लाया गया। साथ ही भगवान के समवसरण के समक्ष विराजमान कर कई साधु संतों के सान्निध्य में श्रुत स्कन्ध विधान हुआ। प्रज्ञासागर महाराज के निर्देशन एवं स्वस्ति चारुकीर्ति स्वामी के नेतृत्व में यह विधान किया गया।


प्रात: काल भंडार बसदि में विराजित विशाल चौबीसी में 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाओं का सप्तरंगी मस्तकाभिषेक 24 इंद्रों द्वारा किया गया। रविवार को आचार्य विमल सागर का समाधि दिवस चामुण्डराय मंडप में दोपहर 1 बजे से मनाया जाएगा, जिसमें आचार्य पुष्पदन्त सागर द्वारा विनयांजलि समर्पित की जाएगी। गुरु पूजन होगा।

ज्ञान के बिना आत्मा शून्य है
आचार्य पुष्पदंत सागर ने प्रवचन में कहा कि ज्ञान दिखता नहीं मगर सुनकर अनुभव होता है। पुष्प दिखता है मगर सुगंध का अनुभव होता है। जो साधु दूसरों का अनुकरण नहीं करते जमाना उन्हें जानता है। ज्ञान के बिना आत्मा शून्य और जड़ है। आत्मा के बिना शरीर मृत एवं मूल्यहीन है। आत्मा दिखती नहीं है परंतु उसका अनुभव होता है। जो दिखता है वह कमजोर है जो अनुभव से समझ में आता है वह बलशाली है। तन कमजोर है मन बलशाली है। गुरु की कृपा, करुणा और आज्ञापालन के बिना पुण्योपार्जन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मन हमारे ध्यान का केंद्र है और शाश्वत आत्मा हमारे प्रेम का लोकबिंदु है।


संगठन से ही समाज का समग्र विकास
बेंगलूरु. संगठन विकास का कारण बनता है लेकिन विघटन विनाश को जन्म देता है। चूंकि हव्यक सम्मेलन संगठन को मजबूत करने में लगा हुआ है इसलिए हमें इसका समर्थन करना चाहिए। संगठन से ही समाज का समग्र विकास संभव है।

यह विचार रामचंद्रपुर मठ के शंकराचार्य राघवेश्वर भारती स्वामी ने व्यक्त किए। वे शनिवार को पैलेस मैदान में आयोजित विश्व हव्यक सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हव्यक का अर्थ है उजाला। जो स्वयं रोशन होता है वही दूसरों को रोशनी बांट सकता है। यही हव्यक संस्कृति है। श्रीमद्भागवत गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि हम स्वयं अपने मित्र हैं और शत्रु भी।

हमें अपने उद्धार के लिएखुद ही प्रयास करना होगा और संगठित होना होगा। कोई और हमारे विकास का दरवाजा खोलेगा,यह विचार सही नहीं है। इस मौके पर पेजावर मठ के विश्वेश्वर तीर्थ स्वामी ने कहा कि हव्यक समाज अपनी प्रतिभा और बौद्धिक क्षमता के लिएजाना जाता है। उडुपी मठ में ढेर सारे हव्यक विद्याथी हैं जो बेदद प्रतिभाशाली हैं।

उन्होंने समाज के संगठन पर जोर दिया। समारोह में जस्टिस श्रीधर राव, वरिष्ठ भाजपा नेता केएस ईश्वरप्पा, पूर्व मंत्री सुरेश कुमार सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे। इस मौके पर हव्यक समाज के ७५ किसानों का सम्मान किया गया। सुबह गोष्ठी में समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंतन मंथन हुआ। सुबह का शुभारम्भ सामूहिक गीता पाठ से हुआ। इस दौरान समूचा पैलेस मैदान श्लोकों से गुंजायमान रहा। शनिवार को शुरू हुआ फूड फेस्टिवल रविवार तक चलेगा।

विभिन्न राज्यों के १४४ स्टॉल में होगी २५५ खादी उत्पादों की प्रदर्शनी
बेंगलूरु. शहर के फ्रीडम पार्क के परिसर मे २ जनवरी से राष्ट्रीय स्तर के खादी मेले का आयोजन किया जा रहा है। लघु उद्यम मंत्री एस.आर. श्रीनिवास ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ३१ जनवरी तक चलने वाले इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी करेंगे, २९ दिन तक चलने वाले इस मेले में इस १ लाख ५० लोग भाग लेने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मेले में ५० करोड़ रुपए मूल्य के खादी के २५५ उत्पादों का प्रदर्शन तथा बिक्री होगी।

मेले में देश के विभिन्न राज्यों के ३१ तथा राज्य के ४६ स्टॉल्स समेत कुल १४४ स्टॉल्स होंगे। मेले के दौरान प्रति दिन शाम को राज्य के विभिन्न जिलों के लोक कलाकार, संगीत कलाकार प्रति दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए जाएंगे। इसके अलावा खादी फैशन शो तथा मेला देखने आने वालों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा।

शंकर शर्मा
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