scriptRainfall pattern changed in the state | बदल चुका है बादलों के बरसने का अंदाज | Patrika News

बदल चुका है बादलों के बरसने का अंदाज

इस वर्ष मानसून पूर्व वर्षा सामान्य से 105 प्रतिशत अधिक, कम समय में तेज गति से भारी बारिश के कारण कई जगह हुआ नुकसान

बैंगलोर

Published: June 02, 2022 10:46:39 pm

बेंगलूरु. राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की आमद से पहले हुई मानसून पूर्व की बारिश सामान्य से करीब 105 प्रतिशत अधिक रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मंगलवार को कर्नाटक में प्रवेश कर लिया था।
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कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के आंकड़े बताते हैं कि इस साल 1 मार्च से 31 मई के बीच हुई बारिश हाल के वर्षों (1960-2010) की तुलना में सामान्य से कहीं अधिक रही है। 2021 में मानसून पूर्व की वर्षा सामान्य से 44 और 2020 में केवल 3 प्रतिशत ही अधिक थी।
प्राधिकरण ने कहा, इस अवधि के दौरान पूरे राज्य में 237 मिमी बारिश हुई, जो कि 51 वर्ष में (1971 के बाद) सबसे अधिक है। इस दौरान राज्य के 27 जिलों में बहुत अधिक, तीन में अधिक और एक जिले (बीदर) में सामान्य वर्षा दर्ज की गई।
केएसडीएमए के मुताबिक कर्नाटक की सामान्य वार्षिक वर्षा लगभग 1,153 मिमी है। इसमें से 74 प्रतिशत तो दक्षिण-पश्चिम मानसून लाता है, जबकि 16 प्रतिशत बारिश पूर्वोत्तर मानसून के दौरान होती है। मानसून पूर्व की बारिश करीब 10 प्रतिशत रहती है।
कहीं पानी-पानी तो कहीं बूंद बूंद को तरसें

प्राधिकरण के डेटा विश्लेषण के मुताबिक 1960 के बाद से दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा की परिवर्तनशीलता काफी बढ़ गई है। हाल के वर्षों में सामान्य से बड़े विचलन दर्ज किए गए हैं। जैसे ही दक्षिण-पश्चिम मानसून आता है, तो कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश के छोटे-छोट या तीव्र बारिश के दौर आते हैं। लेकिन कई जिलों में कम बारिश का सिलसिला भी जार है। कई जगहों पर तो लंबे समय तक अवर्षा की स्थिति भी देखी जा सकती है।
वर्षा की मात्रा, तीव्रता और वितरण में भिन्नता

पिछले 58 वर्षों के दीर्घकालिक जलवायु डेटा शृंखला के अध्ययन से पता चलता है कि कर्नाटक में वर्षा के पैटर्न में काफी बदलाव आया है। 1960 से 1990 की अवधि से 1991-2017 तक राज्य के सभी क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा, तीव्रता और वितरण में भिन्नता दिखाई देती है। कोडग़ु, कलबुर्गी, यादगीर, दक्षिण कन्नड़ और उत्तर कन्नड़ जिलों में वार्षिक वर्षा में कमी देखी गई है, जबकि शिवमोग्गा और हासन जिलों में उक्त अवधियों के दौरान बारिश में वृद्धि देखी गई है।
प्री मानसून के दौरान हुआ काफी नुकसान

केएसडीएमए के आंकड़ों के अनुसार मानसून पूर्व की अवधि में राज्य के अधिकांश भागों में कम समय में उच्च-तीव्रता वाली वर्षा हुई। इसने राज्य के कई हिस्सों में कहर बरपाया था, जिससे बाढ़ आई और जानमाल, बुनियादी ढांचे और खड़ी फसलों का नुकसान हुआ था।

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