दुर्लभ और छोटी जंगली बिल्लियों को चाहिए अधिक संरक्षित क्षेत्र

  • निकट संबंध होने के बावजूद पर्यावरण में परिवर्तन के दौरान विभिन्न प्रजातियां अपने स्वभाव के अनुसार प्रतिक्रिया करती हैं।

By: Nikhil Kumar

Published: 21 Nov 2020, 10:49 PM IST

बेंगलूरु. भारतीय उपमहाद्वीप में दुर्लभ और छोटी जंगली बिल्लियों की चार प्रजातियों के लिए पर्याप्त निवास का औसतन छह से 11 फीसदी ही संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। शेष असुरक्षित हैं।

एक नए अध्ययन में यह बात सामले आई है। जैविक विज्ञान राष्ट्रीय केंद्र (एनसीबीएस) के विशेषज्ञों के अनुसार छोटी, मायावी और दुर्लभ प्रजातियों को अक्सर संरक्षण की सबसे अधिक आवश्यकता होती हैं लेकिन डेटा की कमी संरक्षित क्षेत्र के आड़े आती है।

एनसीबीएस, उप्साला विश्वविद्यालय और सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री सहित अन्य संस्थानों की साझेदारी में किए गए इस अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि निकट संबंध होने के बावजूद पर्यावरण में परिवर्तन के दौरान विभिन्न प्रजातियां अपने स्वभाव के अनुसार प्रतिक्रिया करती हैं। इन प्रजातियों को बचाए रखने के लिए भविष्य में संरक्षित क्षेत्रों का दायरा बढ़ाने की जरूरत है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप के संबंध में यह और महत्वपूर्ण है क्योंकि उपमहाद्वीप जंगली बिल्ली प्रजातियों के लिए वैश्विक आकर्षण का केंद्र है।

उप्साला विश्वविद्यालय के आंद्रे पी. सिल्वा ने बताया कि इनमें से कुछ प्रजातियां, जैसे कि फिशिंग कैट दुर्लभ है और जीवित रहने के लिए इसे सुरक्षा की जरूरत है। जंगली चित्तीदार बिल्ली जैसी प्रजातियां भारतीय उपमहाद्वीप में ही पाई जाती हैं इसलिए संरक्षित क्षेत्र का दायरा बढ़ाना और आवश्यक हो गया है।

दूसरी लेखिका शोमिता मुखर्जी ने कहा कि भारत बिल्ली परिवार और विशेषकर छोटी बिल्लियों का गढ़ है। देश में बड़ी संख्या में संरक्षित क्षेत्र होने के बावजूद जंगली बिल्लियों के लिए जगह कम है। संरक्षित क्षेत्र के बाहर जीवित रहना कठीन, चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित है।

Nikhil Kumar Reporting
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