जब बढ़ा विवाद तो, मंत्रालय छोडऩे को हो गए तैयार

वन मंत्री आनंद सिंह बोले-मुख्यमंत्री चाहें तो बदल दें विभाग

बेंगलूरु.
वन मंत्री बनाए जाने के बाद से विवादो में घिरे बल्लारी जिले के विजयनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक आनंद सिंह ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा उनका विभाग बदलना चाहें, तो वह इसके लिए तैयार हैं।
दरअसल, आनंद सिंह के खिलाफ कर्नाटक वन अधिनियम के तहत दर्जन भर से अधिक मामले लंबित हैं। ऐसे में उन्हें वन मंत्री नियुक्त करने के फैसले की चौतरफा कड़ी आलोचना हो रही है। आनंद सिंह ने स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ 15 मामले लंबित है। उन्होंने कहा कि अगर कोई चाहे तो आरोप पत्र देख सकता है और ये भी जान सकता है कि उनपर 15 मामले दर्ज हैं। वे राज्य की जनता को अंधेरे में नहीं रखना चाहते। लेकिन, विपक्ष और मीडिया को यह देखना भी चाहिए कि इन मामलों में हुआ क्या। अगर उनके ऊपर कोई सीधा आरोप है तो कोई भी सवाल पूछ सकता है। फिर भी अगर मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा को लगता है कि उनके वन मंत्री होने के कारण राज्य के वनों को लूट लिया जाएगा या तबाह कर दिया जाएगा, और वह विभाग बदलना चाहें, तो इसके लिए तैयार हैं।
आनंद सिंह के मुताबिक उनके खिलाफ जो 15 मामले हैं उनमें से 12 मामलों पर पर अदालत ने स्थगनादेश दिया है जबकि 3 मामले विचाराधीन हैं। उपचुनावों के दौरान दिसम्बर 2019 में आनंद सिंह की ओर से दायर चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ 15 मामले लंबित दिखाए गए हैं। इन अपराधों में कर्नाटक वन अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) और खान एवं खनिज (विकास अधिनियम) का उल्लंघन हुआ है। आनंद सिंह को पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय दिया गया था लेकिन मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल किया जिसके बाद आनंद सिंह को वन मंत्रालय मिला। उनके वन मंत्री बनते ही हितों के टकराव का भी मामला उठा और विपक्ष भी हमलावर हो गया।
सीएम से मिले, अपना पक्ष रखा
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि जो व्यक्ति वन विभाग के नियमों का उल्लंघन कर जेल जा चुका है उसे वनमंत्री बनाकर देशभक्ति तथा सिद्धांतों की बाते करनेवाले भाजपा नेता कौनसा संदेश देना चाहती है। इस बीच चौतरफा आलोचनाओं के बीच आनंद सिंह शुक्रवार को मुख्यमंत्री बीएस यडियूरप्पा से मिले और अपना पक्ष रखा। सूत्रों का कहना है कि आनंद सिंह ने स्वयं ही वन विभाग के बदले कोई दूसरा विभाग सौंपने की मांग की है। लेकिन, वे चाहते हैं की बल्लारी जिले के प्रभारी मंत्री पद उनके पास ही रहे। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक द्वेष के कारण कांग्रेस नेता उनपर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। जब वे कांग्रेस में थे तब सब वे चुप क्यों थे।
सदन में मामले को उठाएगी कांग्रेस
उधर, बल्लारी के पूर्व कांग्रेस सांसद वी.एस.उग्रप्पा ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आनन्द सिंह अवैध खनन मामले के प्रमुख आरोपी है। उनका विभाग बदला जाना चाहिए। मुख्यमंत्री उनसे वन विभाग लेकर कोई अन्य विभाग दें। कांग्रेस आगामी बजट सत्र में विधानमंडल के दोनों सदनों में इस मामले को उठाएगी।

Rajeev Mishra Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned