तीन दशक में बदल गई दूर संवेदी उपग्रहों की रूप-रेखा

तीन दशक में बदल गई दूर संवेदी उपग्रहों की रूप-रेखा

Sanjay Kumar Kareer | Publish: Apr, 05 2018 12:57:17 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

दूर संवेदी उपग्रहों के अनुप्रयोग में इसरो आदर्श मॉडल, आईआरएस-1ए की लांचिंग से शुरू हुआ था सफर

बेंगलूरु. सामाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं में अंतरिक्ष उत्पादों के अधिकतम उपयोग के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दूर संवेदी और भू-अवलोकन उपग्रहों की श्रृंखला लांच की है। ये अत्याधुनिक उपग्रह आज हर 15 मिनट केअंतराल पर एक मीटर से भी कम रिजोल्यूशन (हाई रिजोल्यूशन) की तस्वीरें और भू-स्थानिक सूचनाएं प्रदान कर रहे हैं। इन आंकड़ों का उपयोग विभिन्न अनुप्रयोगों और निर्णयों में किया जा रहा है। इसरो ने कहा है कि आज देश दूर संवेदी उपग्रहों के अनुप्रयोग में दूसरों के लिए आदर्श बन गया है।

आईआरएस-1ए के प्रक्षेपण से शुरू हुआ दूर संवेदी उपग्रहों का सफर तीन दशकों में नई ऊंचाइयां छू रहा है। देश के लिए आईआरएस-1 ए का प्रक्षेपण गर्व का क्षण था। इसे 17 मार्च 1988 को बैकनूर स्थित सोवियत कोस्मोड्रोम से छोड़ा गया था। इसने प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में विभिन्न आवश्यकतओं को पूरा करने के लिए उपग्रहों की उपयोगिता को दर्शाया।

इसके बाद वर्ष 1991 में इसी शृंखला का अगला उपग्रह आईआरएस-1बी लांच किया गया। इन दोनों उपग्रहों ने कृषि, वानिकी, भू-विज्ञान तथा जलविज्ञान सहित विभिन्न अनुप्रयोग के क्षेत्रों में प्राकृतिकसंसाधन सूचना प्रदान करने में विश्वसनीय साबित हुए। इस छोटी शुरुआत के बाद उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुसार उन्नत पे-लोड से युक्त आईआरएस उपग्रहों की शृंखला छोड़ी गई।

इसरो ने कहा है कि सामान्य जरूरतों को पूरा करने के साथ ही आईआरएस मिशन की विशेष परिभाषा तय की गई जो भविष्य के उपग्रह कार्यक्रमों का आधार बना और उनका नामकरण भी उसी तरह किया गया।

दरअसल, यह परिभाषा प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, महासागर और वायुमंडलीय अध्ययन और मानचित्रण अनुप्रयोगों के आधार पर तय हुई और फिर भूमि या जल संसाधनों के अनुप्रयोग के लिए रिसोर्ससैट और रिसैट शृंखला के उपग्रह छोड़े गए।

वहीं महासागर और वायुमंडलीय अध्ययनों के लिए ओशियनसैट, इनसैट-वीएचआरआर, इनसैट-3 डी, मेघा ट्रॉपिक्स, सरल आदि उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया। वहीं वृहद पैमाने पर मानचित्रण अनुप्रयोगों के लिए कार्टोसैट शृंखला उपग्रह तैयार किए गए।

इसरो ने कहा है कि आईआरएस-1 ए का प्रक्षेपण एक विशेष उपलब्धि थी जिसके 30 वर्ष पूरा होते-होते भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम और विशेष रूप से दूर संवेदी उपग्रहों के अनुप्रयोग में देश दूसरों के लिए एक आदर्श बन गया।

आज भू-अवलोकन उपग्रहों की इमेजिंग क्षमता कई गुणा बढ़ चुकी है। दृश्य, इंफ्रारेड, तापीय और सूक्ष्म तरंग में इमेजिंग क्षमता के साथ इलेक्ट्रो मैगनेटिक स्पेक्ट्रम और हाइपर-स्पेक्ट्रल सेंसर ने देश की अहम ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा किया है। अब 1 मीटर से सूक्ष्म वस्तु की भी इमेजिंग हो रही है और बादलों या कुहरे के पार भी उपग्रह देखने में सक्षम हैं। इसरो ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारतीय भू-अवलोकन उपग्रह अधिक मजबूत और बेहतर तकनीक से युक्त होंगे जो नई जरूरतों को पूरा करेंगे।

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