संविधान की सुरक्षा के लिए देशद्रोह को कानून की किताब से हटाना होगा: जस्टिस दास

उन्होंने कहा कि यह सभी औपनिवेशिक कानून हैं जिन्हें अंग्रेज लोग इसलिए लाए थे ताकि स्वतंत्रता के आंदोलन और अंग्रेजों के खिलाफ उठने वाली आवाज को कोर्ट में दबाया जा सके।

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 14 Feb 2020, 07:39 PM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एचएन नागमोहन दास ने कहा है कि देशद्रोह, अदालत की आपराधिक अवमानना व आपराधिक मानहानि जैसे शब्दों को कानून की किताब से हटा दिया जाना चाहिए।
दास यहां फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएमआरएआई) की सामान्य परिषद की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि किसी भी मामले पर देशद्रोह के कानून का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। देशद्रोह का इस्तेमाल सवाल, आलोचना की शक्ति को दबाने के लिए किया जाता है। इसी तरह अदालत की आपराधिक अवमानना और आपराधिक मानहानि को कानून की किताब से हटाया जाना चाहिए।

दास ने कहा कि यह सभी औपनिवेशिक कानून हैं जिन्हें अंग्रेज लोग इसलिए लाए थे ताकि स्वतंत्रता के आंदोलन और अंग्रेजों के खिलाफ उठने वाली आवाज को कोर्ट में दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में कानून की किताब से देशद्रोह, अदालत की आपराधिक अवमानना व आपराधिक मानहानि जैसे शब्दों को खत्म कर दिया गया है। संविधान को सुरक्षित रखने के लिए हमें इन तीन शब्दों को कानून की किताब से हटाना होगा।

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Santosh kumar Pandey Desk
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