नहीं रहीं संगीत की दोनों धाराओं को साधनेवाली श्यामला

‘उभयगान विदुषी’ ने ली अंतिम सांस

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 22 May 2020, 09:08 PM IST

बेंगलूरु. भारतीय संगीत की दोनों धाराओं को साधनेवाली अद्भुत प्रतिभा की धनी श्यामला जी भावे का शुक्रवार को निधन हो गया। महान गायिका भावे (79) वर्ष की थीं और पिछले कुछ वर्षों से बीमार थीं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि दिल का दौरा पडऩे के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली।

श्यामला जी भावे सच्चे अर्थों में कर्नाटक की कला का प्रतिनिधित्व करती थीं। उन्हें हिन्दुस्तानी और कर्नाटक, दोनों शैलियों के गायन में महारत हासिल थीं। इसी बेजोड़ प्रतिभा के कारण उन्हें सर एम विश्वेश्वरैया ने ‘उभयगान विदुषी’ की उपाधि दी थी।

कहा जाता है कि संगीत के प्रति लगाव के कारण ही उन्हें विवाह के बंधन में बंधने की सुध ही नहीं रही। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं। तीन दिन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई और शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

विरासत में मिले संगीत के संस्कार
भावे को संगीत के संस्कार विरासत में और घुट्टी की तरह मिले थे क्योंकि उनके माता-पिता दोनों संगीतकार थे। उनके पिता गोविंद विट्ठल भावे ने उन्हें हिन्दुस्तानी संगीत सिखाया था जबकि कर्नाटक संगीत की बारीकियां उन्होंने ए सुब्बराया व बी दोरेस्वामी से सीखी थीं। उनकी मां लक्ष्मी भावे भी एक शास्त्रीय संगीतकार थीं।

छह साल की उम्र में ही एक संगीत प्रतियोगिता जीतकर श्यामला ने अपनी अद्भुत प्रतिभा का परिचय दिया था और बारहवें साल में वे मंच पर गायन प्रस्तुत करती दिखाई दी थीं।

हिन्दुस्तानी संगीत के प्रचार में बड़ी भूमिका
हरिप्रसाद चौरसिया के शिष्य प्रसिध्द बांसुरी वादक समीर राव ने बताया कि एक समय कर्नाटक में उनका खूब नाम था। सरलता उनके संगीत में थी तो उनके स्वभाव में भी। हिन्दुस्तानी और कर्नाटक में समान साधना करना आसान नहीं, लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया था। बेंगलूरु मेंं हिन्दुस्तानी संगीत के प्रचार में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। कर्नाटक गायिका नागमणि श्रीनाथ के साथ उनकी जुगलबंदी काफी प्रचलित रही। सुगम संगीत में भी महारत हासिल थी। इसलिए उन्हें हरफनमौला कलाकार कहा जा सकता है। उनका निधन संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति है क्योंकि अब ऐसे विरले कलाकार दूर-दूर तक नहीं दिखाई देते।

Santosh kumar Pandey Desk
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