...ताकि गरीब बच्चों की पढ़ाई में किताबें न हों बाधक

- सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी के उम्मीदों का पुस्तकालय

By: Nikhil Kumar

Published: 15 Nov 2020, 11:52 PM IST

बेंगलूरु. विद्यार्थियों को अब पुस्तक की कमी नहीं खलती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयार के बाबत पुस्तकों के लिए शहर नहीं जाना पड़ता है। तकरीबन सभी पुस्तक एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। इसके पीछे हैं बेलगावी जिले में रायबाग के मूल निवासी निंगप्पा पाटिल जो इन दिनों अपने गांव व आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

बकौल पाटिल, रेलवे मेल सेवा में हेड सॉर्टिंग असिस्टेंट के पद पर रहते हुए वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुए। ग्रामीण बच्चों को पुस्तक के लिए भटकता देख उन्हें दुख होता था। वे नहीं चाहते कि गरीब बच्चों की पढ़ाई में किताबें बाधक हों। यहीं से पुस्तकालय बनाने का विचार उनके मन में आया। हुब्बरवाड़ी गांव के अपने फार्म हाउस में ही चार लाख रुपए की लागत से पुस्तकालय भवन का निर्माण किया और पुस्तक पर करीब 30 हजार रुपए खर्च हुए। कोई भी यहां आकर पढ़ाई कर सकता है और जरूरत के हिसाब से पुस्तक घर ले जा सकता है। पढऩे के बाद पुस्तक समय से लौटानी होती है ताकि दूसरों को परेशानी न हो। पुस्तकालय का निर्माण हुए करीब तीन माह हुए हैं। ज्यादातर विद्यार्थी सप्ताह में चार दिन यहां आकर पढ़ाई करते हैं।

पाटिल ने बताया कि सोशल मीडिया की मदद से वे बच्चों में पढऩे की आदत फिर से विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। पेंशन का कुछ हिस्सा वे पुस्तकों पर खर्च करते हैं। वे चाहते हैं कि पढ़ाई के बाद पुस्तक को बेचने या रद्दी में न फेंक कर लोग इन पुस्तकों को दान कर दें ताकि जरूरतमंद बच्चे इससे लाभान्वित हो सकें।

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Nikhil Kumar Reporting
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