हर महीने एक रात गांवों में गुजारेंगे राजस्व अधिकारी

मौके पर होगा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान-

By: Sanjay Kulkarni

Published: 17 Feb 2021, 05:10 AM IST

बेंगलूरु. राज्य के राजस्व अधिकारी महीने के हर तीसरे शनिवार को एक गांव जाएंगे और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुलझाएंगे। गांवों की ओर हमारा सफर कार्यक्रम (हल्लीय कडेगे नम्म नडिगे) के तहत यह कार्यक्रम 20 फरवरी से शुरू होगा। कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी, तहसीलदार, सर्वेक्षण कर्ता और संबंधित सभी राजस्व अधिकारी गांव में ही रात गुजारेंगे। राजस्व मंत्री आर.अशोक खुद दोड्डबल्लापुर के होसहल्ली गांव में एक रात गुजारेंगे।

इस यात्रा के दौरान अधिकारी राजस्व विभाग के दायरे में आने वाली किसी भी सेवा जैसे भूमि, पेंशन, बीपीएल कार्ड या अन्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का हल करेंगे। अशोक ने कहा कि राज्य में 227 तहसीलदार हैं और हर महीने वे 227 गांवों में जाएंगेा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे समस्याओं का मौके पर ही समाधान करें ताकि लोगों को जिल िकार्यालय के चक्कर लगाने की नौबत नहीं आए। अधिकारियों को गांव के स्कूल के छात्रावास या आंगनवाड़ी केंद्र में एक रात बितानी होगी। इससे वे स्थानीय समस्याओं को समझ सकेंगे। अगर वहां बुनियादी ढांचे जैसे स्कूल भवन आदि को लेकर समस्या है तो उसका तत्काल समाधान होगा।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को लॉजिस्टिक्स पर पैसा खर्च नहीं करने का निर्देश दिया गया है। गांव में जो भी साधन उपलब्ध है उसी से काम चलाना है। महिला अधिकारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें गांव में किसी के घर रहने की अनुमति दी गई है। होसहल्ली की अपनी यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि वह गांव के दलितों के साथ परस्पर चर्चा करेंगे और रात में एक सरकारी छात्रावास में ठहरेंगे।ऐप से होगा पेंशन भुगतानमंत्री ने कहा कि अब पेंशन भुगतान के लिए नए 'नवोदयÓ ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। राशन कार्ड के विवरण के आधार पर सरकार लाभार्थियों को उनकी आयु और आय के आधार पर पहचान करेगी।

अधिकारी लाभार्थियों के घर जाकर उनकी तस्वीरें व अन्य संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे और पेंशन प्रमाण-पत्र जारी करेंगे। बाद में पेंशन लाभार्थियों ेक बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी जाएगी। उम्मीद है इससे फर्जी खातों को कम करने में मदद मिलेगी। फिलहाल सरकार 69 लाख लोगों को पेंशन का भुगतान करती है जिसपर हर साल 7,500 करोड़ रुपए खर्च होती है। हर साल लगभग 4 लाख नए लाभार्थी इसमें जुड़ रहे हैं।

Sanjay Kulkarni Reporting
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