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कर्नाटक : विद्यार्थियों के अभिभावकों के टीकाकरण के आड़े आ रही आरटीई

- बच्चों को स्कूल से लौटाना अनैतिक : शिक्षाविद

बैंगलोर

Updated: December 07, 2021 11:14:05 pm

बेंगलूरु. कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता के लिए कोरोना टीके की दोनों खुराक अनिवार्य की है। लेकिन, शिक्षा का अधिकार अधिनियम इसके आड़े आ रही है।

कर्नाटक विद्यार्थियों के अभिभावकों के टीकाकरण के आड़े आ रही आरटीई

शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि माता-पिता के टीकाकरण नहीं कराने पर बच्चों को स्कूल में प्रवेश से रोकना शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन होगा। महामारी या आपदा प्रबंधन अधिनियम भी शायद बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की अनुमति प्रदान नहीं करता है।

कुछ शिक्षाविदों, बाल अधिकार कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों और अधिवक्ताओं ने मांग की है कि माता-पिता को टीकाकरण के लिए समय दिया जाना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह जनादेश शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करता है।

निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि उन्होंने अभिभावकों को टीकाकरण की अनिवार्यता से अवगत करा टीका लगाने की अपील की है। हालांकि, उनके लिए भी अभिभावकों को मजबूर करना मुश्किल है।

एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ इंग्लिश मीडियम स्कूल्स इन कर्नाटक (केएएमएस) के महासचिव डी. शशिकुमार ने कहा कि टीकाकरण को लेकर केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का भी इंतजार है। तब तक बच्चों को शिक्षा से वंचित करना अनैतिक होगा। केएएमएस बीते एक वर्ष से अभिभावकों के लिए टीकाकरण अनिवार्य करने की मांग करता आ रहा है। सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कोरोना महामारी के कारण पहले ही पढ़ाई का नुकसान हो चुका है। बच्चे पढऩे-लिखना तक भूल चुके हैं। अब बच्चों को स्कूल आने से रोकने का कोई मतलब नहीं है। अभिभावक अगर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझें तो टीकाकरण संभव है। किसी को दंडित कर टीकाकरण लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि स्कूल परिसर के बाहर अभिभावकों के टीकाकरण के लिए विशेष अभियान चलाए। स्कूल प्रबंधन हर संभव मदद के लिए तैयार हैं।

कर्नाटक प्रदेश प्राथमिक स्कूल शिक्षक संघ के महासचिव चंद्रशेखर एन. ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई अभिभावकों को तो याद भी नहीं है कि उन्होंने पहली खुराक कब ली थी। पढ़ाने के साथ-साथ शिक्षकों पर अभिभावकों के टीकाकरण संबंधित सूची तैयार करने का भी दबाव है। सरकार को चाहिए कि वह शिक्षकों को इस दोहरी जिम्मेदारी से मुक्त कर उन्हें पढ़ाने दे। टीकाकरण संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को दे।

कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार ने खुद पुष्टि की है कि टीकाकरण अनिवार्य नहीं स्वैच्छिक है। ऐसे में किसी को मजबूर करना सही नहीं है। कई अभिभावकों का भी कहना है कि स्कूल उन्हें मैसेज भेज टीकाकरण के लिए मजबूर कर रहे हैं। सरकार को टीकाकरण के लिए समय देना चाहिए।

कर्नाटक स्कूल अभिभावक संघ के एक सदस्य ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने मैसेज भेज उन बच्चों को स्कूल से लौटाने की बात कही है, जिनके अभिभावकों ने टीकाकरण नहीं कराया है।

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