कानून के प्रति जागरूकता का अभियान चलाएं : रंजन गोगोई

लोगों में कानून को लेकर जागृति पैदा करने के लिए आवंटित अनुदान का देश के दक्षिण क्षेत्र के राज्यों में शतप्रतिशत उपयोग नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है

By: शंकर शर्मा

Updated: 12 Nov 2017, 09:55 PM IST

बेंगलूरु. लोगों में कानून को लेकर जागृति पैदा करने के लिए आवंटित अनुदान का देश के दक्षिण क्षेत्र के राज्यों में शतप्रतिशत उपयोग नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। समाज में कानून को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान की दरकार है।

विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से यह संभव है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय कानून सेवा प्राधिकार के संयोजक रंजन गोगोई ने यह बात कही। विधानसौधा सभागार में शनिवार को राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण के दक्षिण संभाग के क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन में उन्होंने कहा कि कर्नाटक में ऐसे अनुदान की 4 करोड़ रुपए राशि का अभी तक उपयोग नहीं किया गया है।

इसके अलावा तमिलनाडु में 3 करोड़ 20 लाख आंध्र प्रदेश ने 3 करोड़ 53 लाख, तेलंगाना ने 3 करोड़ 1 लाख रुपए अनुदान का उपयोग नहीं किया है। इस अनुदान की मदद से लोगों में कानून को लेकर जागरुकता पैदा करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकता है।

इस अनुदान खर्च करने के लिए किसी न्यायाधीश की अनुमति भी आवश्यक नहीं है। कानून सेवा प्राधिकार को इस अनुदान का उपयोग करने का अधिकार दिया गया है। इस अनुदान की सहायता से कानून में सुधार के लिए विचार संगोष्ठियों का आयोजन किया जा सकता है। लोगों में कानून को लेकर जागरूकता पैदा करने में कानून सेवा प्राधिकरण महती भूमिका अदा कर सकता है। लेकिन यह प्राधिकरण देश के दक्षिण क्षेत्र के राज्यों में अपेक्षित स्तर पर कार्य नहीं कर रहा है। कर्नाटक में नि:शुल्क कानून परामर्श देने वाले स्वयंसेवी अधिवक्ताओं की संख्या 2093 है इस संख्या में वृद्धि होनी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि राज्य की 6 करोड़ से अधिक आबादी के अनुपात में यह संख्या नगण्य है। राज्य के अधिक अधिवक्ताओं को कानून सेवा प्राधिकरण के माध्यम से लोगों को नि:शुल्क कानूनी परामर्श देने में आगे आना चाहिए। राज्य के सभी तहसील मुख्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के साथ कानून सेवा प्राधिकरण की इकाइयों का गठन किया जाना चाहिए। पडोसी तमिलनाडु में ऐसे 1500 कानून सेवा केंद्र कार्यरत हैं। कर्नाटक में भी ऐसे कानून सेवा केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए।
मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी, कर्नाटक उच्च न्यायालय के प्रभारी मुख्य न्यायाधीश एच.जे.रमेश, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन, केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एंटोनी डोमिनिक, न्यायाधीश ए.एस.बोपण्णा तथा न्यायाधीश ए.एल.नारायणस्वामी उपस्थित थे।

शंकर शर्मा
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