साधु का पंच परमेष्ठि में स्थान-आचार्य महेन्द्र सागर

मुनि राजपद्मसागर का 23 वां दीक्षा दिवस मनाया

By: Yogesh Sharma

Published: 01 Mar 2021, 08:15 PM IST

हासन. जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ में मुनि राजपद्मसागर का २३वां दीक्षा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य महेन्द्रसागर सूरीश्वर ने कहा कि साधु का पंच परमेष्ठि में स्थान है। साधु अगर विशिष्ट कोटि की साधना ना भी करे तो भी पंचपरमेष्ठि में स्थान रहता है। आप श्रावक धर्म का पालन करते हो, यदि आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करो, हर साल दस बारह लाख का दान जीवदया में दो, मासक्षमण का तप करो, तब भी आपका स्थान पंच परमेष्ठि में नहीं आ सकता। क्योकि साधु जगत के जीवों की माता है। जगत के सर्व जीवों के लिए साधु ही आश्रय स्थान है, अभय स्थान और शरणस्थान है। साधु ने मुझे छोटे से छोटे जीव की रक्षा करनी है, ऐसी प्रतिज्ञा ली है। आप जब तक सर्व जीवों के अभय दाता न बनेंं, तब तक किसी सुकृत का अभिमान मत करना और सर्व जीवों के अभयदाता साधु भगवंत के सामने कभी अहंकार भरा व्यवहार मत करना।

मुनि राजपद्मसागर ने उपस्थित महानुभावों से साधु जीवन में निष्ठापूर्वक रहने और चारित्र का श्रेष्ठ पालन करने की शुभकामनाएं मांगी। मेरुपद्मसागर ने साधु का बहुमान व आदर त्याग से करने की बात कही। इस अवसर पर बेंगलूरु, टिपटूर, अरसीकेरे, चिकमंगलूर, चंद्रायपटनम ओर बिरूर से भक्तों का आगमन हुआ। स्थानीय बालिका मण्डल, महिला मण्डल ने संयम अनुमोदना गीतिका प्रस्तुत की। पाठशाला के बालकों ने नाटिका एवं नृत्य प्रस्तुत किया। नरेंद्र धोका, जयन्तीलाल कोठारी एवं वसन्त बोहरा ने वक्तव्य दिए। संघ भक्ति का लाभ चम्पालाल, विशाल कुमार ने लिया।

Yogesh Sharma Reporting
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