जैसा कर्म, वैसा जीवन का चित्र

साध्वी डॉ दर्शनप्रभा ने कहा कि इस संसार में कर्म से बड़ा कोई टेंशन नहीं है। यह सारा संसार उसी के बने हुए पेंटिंग हैं जिसे कोई दूसरा बदल नहीं सकता है। जिसके जैसे कर्म है वैसे ही उसके जीवन की पेंटिंग है।

By: MAGAN DARMOLA

Published: 10 Sep 2021, 08:29 PM IST

बेंगलूरु. गुरु जेष्ठ पुष्कर दरबार, चामराजपेट में साध्वी डॉ दर्शनप्रभा ने कहा कि इस संसार में कर्म से बड़ा कोई टेंशन नहीं है। यह सारा संसार उसी के बने हुए पेंटिंग हैं जिसे कोई दूसरा बदल नहीं सकता है। जिसके जैसे कर्म है वैसे ही उसके जीवन की पेंटिंग है। यदि हमारा घर-परिवार धाम, व्यवहारी मन पसंद है तो हमारे शुभ कर्मों की देन है और हमारे जीवन की पेंटिंग हमारे पसंद के अनुरूप नहीं है तो हमारे अशुभ कर्मों की देन है। हम जितना अधिक बात करेंगे, हमारे जीवन और सीखों के पेंटिंग बढ़ती जाएगी।

साध्वी समृद्धिश्री ने अंतगढ़ सूत्र का वांचन करते हुए कहा कि कर्मों को धोने और आत्मा को पवित्र पावन बनाने का अवसर आया है। जीव से शिव, कंकर से शंकर, आत्मा से परमात्मा बनाने का अवसर है। यह गोल्डन चांस मिला है। यह अवसर हमें मानव भव में मिलता है और चॉइस भी मानव की मिली है। अब क्या करना है- पाप या पुण्य,धर्म या अधर्म, योग या भोग। आत्मा को वेटलेस बनाएं।

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