सागरमाला से मछुआरों के हितों पर चोट नहीं : पुजारी

कहा-मछुआरों को भड़काने का काम कर रहे हैं विधायक

सागरमाला परियोजना पर भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद अमल शुरू नहीं किया है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दिसम्बर 2017 में इसका औपचारिक शिलान्यास किया था। विडंबना है कि उस वक्त शिलान्यास कार्यक्रम में भाग लेने वाले कांग्रेस विधायक अब इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

बेंगलूरु. मत्स्य, बंदरगाह मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी ने मछुआरों के प्रदर्शन के संदर्भ में गुरुवार को कहा कि सागरमाला परियोजना के तहत उत्तर कन्नड़ जिले के कारवार बंदरगाह के विकास से स्थानीय मछुआरों के परंपरागत मत्स्याखेट में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होगी।


पुजारी ने विधानसौधा स्थित अपने कार्यालय में गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि परियोजना के कारण पारंपरिक व मशीनों से मछलियां पकडऩे में कठिनाइयां आने का भ्रम पैदा करके मछुआरों को विरोध प्रदर्शन के लिए लिए उकसाया जा रहा है। जिसके पीछे स्थानीय विधायक सतीश का हाथ है। सागरमाला परियोजना पर भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद अमल शुरू नहीं किया है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दिसम्बर 2017 में इसका औपचारिक शिलान्यास किया था। विडंबना है कि उस वक्त शिलान्यास कार्यक्रम में भाग लेने वाले कांग्रेस विधायक अब इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

 

परियोजना से ना तो मछली पकडऩे में कोई बाधा उत्पन्न होगी और ना ही कारवार के रवीन्द्र नाथ टैगोर समुद्र तट को कोई नुकसान होगा। कारवार में 125 करोड़ रुपए की लागत से 880 मीटर लंबी लहरों को रोकने वाली दीवार निर्मित की गई है। इससे कारवार बंदरगाह हरेक ऋतु में उपयोग के योग्य बनेगा और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यहां पर अधिक संख्या में बड़े जहाजों के लंगर डालने से क्षेत्र का आर्थिक विकास होने के साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


मंत्री ने आरोप लगाया कि परियोजना से कोई कठिनाई नहीं होने के बावजूद कांग्रेस के नेता मछुआरों को गुमराह कर रहे हैं। मछुआरों का भ्र्रम दूर करने के लिए जल्द ही मछुआरों के प्रतिनिधियों व जन प्रतिनिधियों की बैठक बुलाकर वस्तुस्थिति से अवगत करवाया जाएगा। जिला प्रभारी मंत्री शशिकला जोळे तथा विधायक रूपाली नायक भी उपस्थित थीं।


विधायक रूपाली ने कहा कि परियोजना से किसी को समस्या नहीं होने के बावजूद स्थानीय विधायक सतीश सेल व पूर्व विधायक आनंद अस्नोटिकर मछुआरों को विरोध प्रदर्शन करने के लिए उकसा रहे हैं। इस परियोजना के संबंध में उन्होंने स्थानीय मछुआरों के साथ छह बार बैठक करके समझाया है। इसके बावजूद उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रचकर बदनाम किया जा रहा है।

Surendra Rajpurohit
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