अष्टान्हिका महोत्सव के तीसरे दिन संतीकरं पूजन

त्यागराजनगर में धर्मसभा

By: Yogesh Sharma

Published: 24 Sep 2021, 07:50 AM IST

बेंगलूरु. महावीर स्वामी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ त्यागराज नगर में विराजित आचार्य महेंद्रसागर सूरी की निश्रा में अष्टान्हिका महोत्सव के तीसरे दिन संतीकरं महापूजन पढ़ाया गया। इस दौरान आचार्य ने कहा कि सतिकरं स्त्रोत पूर्व आचार्य द्वारा मर्की के उपद्रवोंं को दूर करने के लिए रचा गया है। इसमें भगवान शांतिनाथ की स्तुति है। इसमें समस्त शासन देवियों एवं चारों प्रकार के देवताओं से सकल संघ की रक्षा की कामना एवं शांति प्रदान करने की विनती की गई है। शांति का कारण भूत मानकर स्त्रोत को प्रभावशाली माना जाता है। इसे पवित्रता से पढऩे से तुरंत ही सफलता मिलती है। ऐसा बताया गया है स्त्रोत से मंंित्रत जल का छिडक़ाव करने से भूत प्रेत शाकिनी आदि उपद्रव नाश होते हैं। यह स्त्रोत सूरी मंत्र बीजाक्षरयुक्त है। सूरी मंत्र के जाप में जितने भी देवी देवता हैं उनका स्मरण और उन देव सभी देवी देवियों का संक्षिप्त में उल्लेख किया गया। इसका त्रिकाल स्मरण रोगादी,बाह्य कष्ट तथा द्वेष अज्ञान आदि अंतरंग कष्टों का नाश करता है। सम्यग निर्जरा से उत्कृष्ट पुन्यानुबंधी का बंद होता है। मन में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने के लिए और भय दूर करने के लिए इसका विशेष प्रकार से पाठ करना चाहिए।

Yogesh Sharma Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned