बागी विधायकों की याचिका पर फैसला बुधवार को

बागी विधायकों की याचिका पर फैसला बुधवार को

Rajendra Shekhar Vyas | Updated: 16 Jul 2019, 10:54:55 PM (IST) Bangalore, Bangalore, Karnataka, India

सुप्रीम कोर्ट में लंबी चली सुनवाई

कांग्रेस-जद (एस) के 15 बागी विधायकों ने दायर की थी याचिका

बेंगलूरु.
Supreme Court ने Congress-JDs के 15 बागी विधायकों की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली। विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश देने के लिए याचिका दायर की है। न्यायालय अब बुधवार सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री का पक्ष सुनने के बाद यह आदेश दिया।
Vidhan Sabha अध्यक्ष केआर रमेश कुमार की ओर से Senior advocate Abhishek Manu Singhvi ने विधायकों के इस्तीफों पर निर्णय के लिए बुधवार तक का वक्त देने का अनुरोध किया। न्यायालय इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने संबंधी पहले के आदेश में सुधार करे। सिंघवी ने कहा कि अयोग्यता और Rebel legislators के इस्तीफों पर अध्यक्ष बुधवार तक निर्णय ले लेंगे लेकिन न्यायालय को यथास्थिति रखने संबंधी अपने आदेश में सुधार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैध त्यागपत्र व्यक्तिगत रूप से अध्यक्ष को सौंपना होता है और ये विधायक अध्यक्ष के कार्यालय में इस्तीफा देने के पांच दिन बाद 11 जुलाई को उनके समक्ष पेश हुए।
सदन में उपस्थिति से मिले छूट: रोहतगी
विधायकों की ओर से Senior advocate Mukul Rohatgi ने न्यायालय से अनुरोध किया कि उनके इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने का अध्यक्ष को निर्देश देने संबंधी अंतरिम आदेश जारी रखा जाए। रोहतगी ने कहा कि अगर विधानसभा की कार्यवाही होती है तो विधायकों को सत्तारूढ़ गठबंधन की ह्विप के आधार पर सदन में उपस्थित होने से छूट दी जाए क्योंकि मौजूदा सरकार अल्पमत में आ गई है।
स्पीकर क्या करेंगे, हम तय नहीं करेंगे: कोर्ट
उन्होंने कहा कि कोई विधायक बने रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। इस्तीफा स्वीकार किया जाना चाहिए। स्पीकर इस्तीफे को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। वे एक ही समय में इस्तीफे और अयोग्यता दोनों मुद्दों पर निर्णय लेने का प्रयास कर रहे हैं। इस पर chief justice ने कहा कि अदालत यह तय नहीं करेगी कि स्पीकर को इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए या नहीं। वे केवल यह देख सकते हैं कि संवैधानिक रूप से स्पीकर पहले किस मुद्दे पर फैसला ले सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट नहीं दे सकता निर्देश: धवन
मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से अधिवक्ता राजीव धवन अपनी दलील पेश करते हुए शीर्ष अदालत से कहा कि सुप्रीम कोर्ट को विधानसभा अध्यक्ष को इन इस्तीफों पर निर्णय लेने और फिर बाद में इस्तीफों और अयोग्यता के मामले में यथास्थिति बनाए रखने के Interim order देने का कोई अधिकार नहीं था।
उन्होंने कहा कि विधानसभा speaker को एक समय सीमा के भीतर इस मुद्दे पर निर्णय के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। जब इस्तीफे की प्रक्रिया नियमानुसार नहीं है तो न्यायालय अध्यक्ष को शाम छह बजे तक निर्णय करने का निर्देश नहीं दे सकता। बागी विधायक सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। न्यायालय को उनकी याचिका पर विचार नहीं करना था।
विधानसभा अध्यक्ष की ओर से Senior Advocate Abhishek Manu Singhvi ने भी पीठ से सवाल किया कि अध्यक्ष को यह निर्देश कैसे दिया जा सकता है कि मामले पर एक विशेष तरह से फैसला लिया जाए। इस तरह का आदेश तो निचली अदालत में भी पारित नहीं किया जाता है।
स्पीकर को ऊंचा दर्जा दिया, पुनर्विचार की जरूरत: कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश ने hearing के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हमने स्पीकर को हमेशा ऊंचा दर्जा दिया है, लेकिन पिछले 20-30 वर्षों में जो कुछ हुआ, उस पर गंभीरता से पुनर्विचार की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक मुकल रोहतगी और सिंघवी ने जो जिरह की है, दोनो के पास अपने अहम तर्क हैं और अदालत संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।

अब निगाहें फैसले पर
अब निगाहें बुधवार को फैसले पर है क्योंकि शीर्ष अदालत के इस फैसले से तय होगा कि स्पीकर विधायकों के इस्तीफे पर फैसला करेंगे या फिर अयोग्यता की कार्रवाई को आगे बढ़ा सकते हैं। फैसले का 18 जुलाई को गठबंधन सरकार के बहुमत परीक्षण पर भी असर पड़ सकता है।

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