दूर की आकाशगंगा में एक असाधारण महाविस्फोट

अब तक के ज्ञात ऐसे किसी भी विस्फोट से 5 गुणा अधिक शक्तिशाली
आकाशगंगा पुंज के विशाल अंतरिक्ष में मौजूद गैस को बाहर कर खोखला कर दिया

By: Rajeev Mishra

Published: 01 Mar 2020, 10:10 AM IST

बेंगलूरु.
तरह-तरह के रहस्यों से चौंकाने वाले अंतरिक्ष ने फिर एक बार खगोल वैज्ञानिकों को अचंभित किया है। दरअसल, दूर की आकाशगंगा में एक ऐसे असाधारण महाविस्फोट के साक्ष्य मिले हैं जो अभी तक के ज्ञात ऐसे किसी भी विस्फोट से 5 गुणा अधिक शक्तिशाली था।
यह अद्भूत खगोलीय घटना ओफिउकस तारासमूह में स्थित एक आकाशगंगा में घटी है। यह आकाशगंगाओं के एक विशाल पुंज की सदस्य है और पृथ्वी से 39 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है। अंतरिक्ष की ये दूरियां अकल्पनीय हैं। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर रमेश कपूर (सेनि) ने बताया कि यह एक अभूतपूर्व घटना है। इस आकाशगंगा के केंद्र में हुआ विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उससे निकली ऊर्जा ने उस आकाशगंगा पुंज के भीतर के विशाल अंतरिक्ष में मौजूद गैस को बाहर फेंककर उसे खोखला कर दिया है। खगोल वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह विस्फोट अब तक के ज्ञात ऐसे किसी भी विस्फोट से 5 गुणा अधिक शक्तिशाली था।
अति विशाल ब्लैकहोल विस्फोट की वजह!
प्रोफेसर कपूर ने बताया कि हमारी आकाशगंगा 200 अरब तारों का एक विशाल समूह है। जिसके एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने में प्रकाश को एक लाख वर्ष लग जाते हैं। ऐसी अरबों आकाशगंगाएं इस ब्रह्मांड में है जिनके बीच की दूरियां लाखों प्रकाश वर्ष तक है। बहुत सी आकाशगंगाएं पुंजों के सदस्य हैं जहां वे एक-दूसरे के गुरुत्वाकर्षण में बंधी हैं। इनके बीच का अंतरिक्ष पूरी तरह निर्वात नहीं है। बेहद विरल रूप में यहां हाइड्रोजन मौजूद है। चर्चित आकाशगंगा में देखे गए इस विस्फोट का कारक है एक अतिविशाल ब्लैकहोल। विस्फोट का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
पैदा हुई असीमित ऊर्जा
ब्लैकहोल के आसपास का अंतरिक्ष खाली नहीं होता। अंतरिक्ष मे मौजूद गैस चाहे वह निकटवर्ती तारों से निकलकर आ रही हो या किसी विशाल बादल का हिस्सा, ब्लैकहोल की तरफ गिरते हुए ये पदार्थ इतने गर्म हो जाते हैं कि उच्च ऊर्जा का विकिरण करते-करते ब्लैकहोल में समा जाते हैं। ऐसी ही किसी प्रक्रिया में चर्चित ब्लैकहोल से इतनी अधिक ऊर्जा निकली होगी कि उसमें बड़े स्तर पर आकाशगंगा पुंज के भीतर अंतरिक्ष को गैस से खाली कर उसे खोखला बना दिया।
करोड़ों वर्ष पूर्व चली होगी प्रक्रिया
करोड़ों वर्ष पूर्व हुई यह प्रक्रिया धीमी गति से चली है। इसका अनुमान वैज्ञानिकों को कुछ वर्ष पूर्व एक्स-रे दूरदर्शियों के माध्यम से हो चुका था। किंतु अब वैज्ञानिकों ने रेडियो तरंगों पर प्राप्त संकेतों से इसकी पुष्टि कर दी है। इस पूरे अध्ययन में नासा की चंद्रा एक्स-रे वेधशाला, यूरोपीयन स्पेस एजेंसी का एक्सएमएमएम-न्यूटन दूरदर्शी, मर्चिसन वाइडफील्ड एर्रे और पुणे के पास नारायण गांव में स्थित जीएमआरटी शामिल रहे हैं। यह सारा अध्ययन इस बात को रेखांकित करता है कि अंतरिक्ष में अध्ययन वर्णक्रम के विभिन्न हिस्सों में एक साथ करने से किसी घटना या प्रक्रिया के ठोस संकेत व साक्ष्य मिल सकते हैं।

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Rajeev Mishra Reporting
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