अपना अहंकार देखें और मुक्त हों: देवेंद्रसागर

राजाजीनगर में प्रवचन

By: Santosh kumar Pandey

Updated: 08 Oct 2020, 05:37 PM IST

बेंगलूरु. आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने राजाजीनगर में प्रवचन में कहा कि अहंकार से परेशान लोगों की बहुत बड़ी दुनिया है, जहां दूसरों के अहंकार से परेशान लोग कम हैं और खुद के अहंकार से परेशान ज्यादा। सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें दूसरों का अहं तो दिखता है, लेकिन अपना नहीं। अपने भीतर का अहंकार देखें और अहंकारमुक्त होने का प्रयत्न करें। अहंकारी व्यक्ति अपने अच्छे काम की और दूसरों के खराब काम की गिनती ही करता रहता है।’ यह अहंकार ही है जिसके चलते सब चाहते हैं कि उनके आसपास वाले उन्हें सुनें, उनका अनुसरण करें। जैसा वह कह रहे हैं, वैसा ही करें।

किसी भी क्षेत्र में प्रबंधन का एक ही अचूक नियम है। दूसरों से उसी तरह काम करवाएं, जिस तरह आप चाहते हैं कि दूसरे आप से काम करवाएं।
उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट का सिद्धांत है कि कर्मचारी को अधिकारी के संकेत को समझना चाहिए। दूसरे शब्दों में दृष्टांत की भाषा में कहा गया कि कर्मचारी को अपने अधिकारी का महाराणा प्रताप वाला चेतक होना चाहिए।

ऐसे कर्मचारी हों तो कंपनी का बहुत विकास होगा। आज यह बात देखने में नहीं आती। यही कारण है कि हर व्यक्ति का अपने काम के प्रति उत्साह कम होता जा रहा है। कितने ही काम ऐसे होते हैं, जो रोज जेहन में आते हैं और उन्हें हम बिना कुछ किए आगे के लिए खिसका देते हैं। हमारे कितने ही सपने और विचार इसी तरह टलते-टलते अतीत बन चुके हैं।

और फिर हमें लगता है कि जिंदगी भी खिसकते-खिसकते ही बीत रही है। दरअसल हम जानते ही नहीं कि आखिर हम चाहते क्या हैं? हम जो चाहते हैं और उसे पूरा करने के लिए जो करना है, इस बीच की दूरी को कम करना ही सफलता दिलाता है।

Santosh kumar Pandey Desk
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