आत्म विकास के लिए स्वाध्याय उत्तम साधन

आत्म विकास के लिए स्वाध्याय उत्तम साधन

Shankar Sharma | Publish: Sep, 09 2018 10:04:20 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

तेरापंथ सभा के तत्वावधान में तेरापंथ भवन, गांधीनगर में साध्वी कंचनप्रभा, साध्वी मंजूरेखा के सान्निध्य में स्वाध्याय दिवस पर धर्मसभा आयोजित की गई।

बेंगलूरु. तेरापंथ सभा के तत्वावधान में तेरापंथ भवन, गांधीनगर में साध्वी कंचनप्रभा, साध्वी मंजूरेखा के सान्निध्य में स्वाध्याय दिवस पर धर्मसभा आयोजित की गई। सभा में साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि मैं कौन हूं, कहां से आया हूं एवं मुझे कहां जाना है? ये प्रश्न आत्मा की अमरता में आस्था रखने वाले व्यक्ति के मन में उठते हैं तथा यहीं से आत्म विकास की यात्रा प्रारम्भ होती है। इसके लिए स्वाध्याय ही उत्तम साधन है। भगवान महावीर ने कहा कि स्वाध्याय से कर्म निर्जरा होती है।

साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि इन्द्रिय जगत में जीने वाला धन, परिवार, और शारीरिक सम्बन्धों की सुरक्षा में खोया रहता है। जहां स्वाध्याय के प्रति अनुराग के साथ लक्ष्य रहता है वहां चेतना के ऊध्र्वारोहण का पथ प्रशस्त होता है। साध्वी निर्भयप्रभा ने स्वाध्याय की महत्ता पर प्रकाश डाला।


समणीवृन्द एवं साध्वीवृन्द ने सुमधुर प्रेरक गीत का संगान किया। स्वागत महिला मंडल अध्यक्ष अनिता गांधी ने किया। माणकचंद संचेती ने श्रावक निष्ठा का वाचन किया। संचालन लक्ष्मीमंत्री प्रकाशचंद लोढ़ा ने किया।

महाश्रमण से नरसीपुर आने की विनती
बेंगलूरु. महावीर जैन संघ, टी नरसीपुर के पदाधिकारियों ने आचार्य महाश्रमण के दर्शन कर आशीर्वाद लिए। उन्होंने आचार्य से टी नरसीपुर में पधारने की विनती की। संघ अध्यक्ष कैलाश चोपड़ा, मंत्री टीलू भंडारी, राकेश पोखरना, संदीप भंडारी, नवल कोठारी आदि शामिल थे।

तप रूपी अग्नि में शरीर को तपाएं
बेंगलूरु. यशवंतपुर जैन स्थानक में साध्वी अमित सुधा ने कहा कि पर्व पर्युषण के पावन पवित्र पलों में आज हमें ‘तप’ रूपी अग्नि से अपने शरीर को तपाकर आत्मा को शुद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि जब आत्मा शुद्धता और पवित्रता को प्राप्त कर लेगी तब उसी तप से हमें अलौकिक ज्योति की प्राप्ति होगी। वही ज्योति मोक्ष महल का तीसरा द्वार खोल देगी। जीवन में तप का विशेष महत्व है। प्रभु महावीर ने अहिंसा, संयम और तप को त्रिवेणी संगम कहा है। यही धर्म उत्कृष्ट व मंगलमय है। साध्वी सौम्याश्री ने अंतगड़ सूत्र वाचन किया। साध्वी वैभवश्री ने गीतिका पेश की।

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