शहर को बाढ़ से बचाएगी सेंसर प्रणाली

शहर को बाढ़ से बचाएगी सेंसर प्रणाली

Shankar Sharma | Publish: Sep, 02 2018 11:25:36 PM (IST) Bangalore, Karnataka, India

राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केन्द्र एक ऐसी तकनीक की स्थापना कर रहा जिसकी मदद से बरसाती नालों के उफनाने की स्थिति में चेतावनी जारी हो जाएगी और प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित बचाया जा सकता है।

बेंगलूरु.राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केन्द्र एक ऐसी तकनीक की स्थापना कर रहा जिसकी मदद से बरसाती नालों के उफनाने की स्थिति में चेतावनी जारी हो जाएगी और प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित बचाया जा सकता है।


बीते साल मानसून के दौरान बेंगलूरु के कई इलाकों में बाढ़ जैसी विकट स्थिति उत्पन्न हो गई थी। हालांकि इस बार अब तक अतिवृष्टि नहीं हुई है जिस कारण शहर में वैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। पिछले साल की विपदा से सबक लेते हुए शहर में बरसाती नालियों को दुरुस्त करने का काम भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, लेकिन उसकी रफ्तार काफी सुस्त है।


केन्द्र इस प्रणाली वाले करीब २५ सेंसर शहर के उन हिस्सों में स्थापित करेगा जो जलजमाव के लिहाज से संवेदनशील हैं। मुख्य रूप से शहर के वैसे हिस्से होंगे जो पिछले कुछ वर्षों के दौरान बाढ़ जैसी स्थिति से जूझ चुके हैं। केन्द्र के निदेशक जीएस श्रीनिवास रेड्डी के अनुसार इन सेंसर को शहर की मुख्य झीलों में स्थापित किया जाएगा, क्योंकि इन झीलों में बरसाती नालों का पानी गिरता है। बरसाती नालों का पानी जब अपनी क्षमता से अधिक हो जाएगा और उफना कर झील के सीमाई क्षेत्र को पार करने की ओर बढऩे लगेगा तब सेंसर खतरे का संदेश जारी करेगा। सेंसर की स्थापना अगले एक महीने के भीतर होने की उम्मीद है।


केन्द्र इसे बाढ़ चेतावनी प्रणाली में एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देख रहा है। अपने 36 टेलीमेट्रिक मौसम स्टेशनों और बारिश गेज डेटा को साथ मिलाकर यह प्रणाली नागरिक आपदाओं चेतावनी देने में कारगर साबित हो सकता है और इससे आपदा प्रबंधन की तैयारियों को समय रहते पूरा किया जा सकता है। रेड्डी के अनुसार अगर किसी क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हो रही है और बारिश गेज इसकी जानकारी दे रहा है, लेकिन बरसाती नालों के मुहाने पर पानी का प्रवाह बिल्कुल कम है तब इस प्रणाली से यह समझा जा सकता है बरसाती नाले का कोई हिस्सा बाधित है। ऐसे में उस बाधित हिस्से को साफ करके पानी का निकास प्रबंधित किया जा सकता है। इससे बरसाती नाले का पानी किसी क्षेत्र में नहीं फैलेगा।


अन्य शहरों में विस्तार की योजना
बाढ़ चेतावनी प्रणाली को फिलहाल प्रायोगिक रूप से क्रियान्वित किया जाएगा और अगर इसकी सफलता के आधार पर बाद में राज्य के अन्य शहरों में भी इस प्रणाली की स्थापना की जाएगी। यह एक तीन वर्ष की परियोजना है, जिसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वित्त पोषित कर रही है। इस परियोजना में उच्च बारिश जोन, अपशिष्ट नक्शा, जल निकासी स्रोत आदि को भी चिन्हित किया जाएगा जिससे संभावित आपदा को नियंत्रित किया जा सकेगा।


भाविसं शोध आधारित है परियोजना
यह परियोजना भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी) में इंटरनेशनल सेंटर फॉर वॉटर रिसर्च द्वारा किए गए शोधों पर आधारित है, जो पिछले चार सालों से शहर में बाढ़ प्रवाह के लिए एक मॉडल बनाने का प्रयास कर रही है। शोधकर्ताओं ने बेंगलूरु दक्षिण में दो जल निकायों हुलिमाव व मडिवाला का इसके शोध के लिए इस्तेमाल किया जिसमें नौ झील शामिल हैं। शोध में सेंसर और प्रयोगशाला प्रयोगों की एक शृंखला का उपयोग करके शोधकत्र्ताओं ने एक सुदृढ़ बाढ़ मॉडल विकसित किया।

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