कोरोना : ज्यादा दिन तक संघर्ष कर रहे गंभीर मरीज

  • भर्ती होने के जल्दी होने वाली मौतों की संख्या घटी
  • डी-डिमर लेवल जांच और एंटी क्लॉटिंग दवा से मिली सफलता

By: Nikhil Kumar

Published: 18 Sep 2020, 10:07 PM IST

बेंगलूरु. कर्नाटक के कोविड अस्पतालों के चिकित्सक गंभीर मरीजों के भर्ती होने के चंद घंटे या कुछ दिन में होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने में काफी हद तक कामयाब हुए हैं।

कोविड वॉर रूम के आंकड़ों के अनुसार जुलाई और सितंबर के शुरुआत में प्रदेश में कोविड के 6,462 मृतकों में से करीब 45 फीसदी की मौत अस्पताल में भर्ती होने के दो दिन में हुई थी। सात फीसदी मरीजों की मौत घरों में या अस्पताल पहुंचने से पहले हुई। बेंगलूरु में जुलाई माह में हुई 932 मौतों में से 55 फीसदी मरीजों ने भर्ती होने के एक दिन में दम तोड़ा। 10 फीसदी मरीज मृत अवस्था में अस्पताल लाए गए।

जुलाई में गंभीर मरीजों के भर्ती होने के दो दिनों में उनकी मौत हो जाती थी। लेकिन सितंबर में ज्यादातर गंभीर मरीजों की मौत भर्ती होने के छह दिनों बाद हुई है। सितंबर माह में, भर्ती होने और मौत के बीच करीब छह दिनों का फासला रहा। जबकि अगस्त और जुलाई में यह फासला क्रमश: 4.6 और 2.7 दिनों का था।

राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिसीजेज के निदेशक और मृत्यु ऑडिट पैनल के सदस्य डॉ. सी. नागराज ने बताया कि शुरू में कोरोना वायरस को महज श्वसन संक्रामक के रूप में देखा जा रहा था। उपचार प्रक्रिया भी इसी पर आधारित थी। बाद में रक्त में थक्के जमने (थ्रोम्बो एम्बोलिज्म) जैसे तथ्य सामने आए। कोरोना मरीजों में डी-डिमर बढऩे के कारण थ्रोंबोसिस की समस्या होने लगी है। मरीजों को इस स्थिति से बचाने के लिए रक्त पतला करने वाली दवा दी जा रही है। कोविड से उबरने के बाद भी मरीजों को अपना डी-डिमर लेवल समय-समय पर चेक करवाते रहना चाहिए। उपचार में एंटीवायरल दवा रेमडेसेवीर की इजाजत मिलने और उपचार प्रोटोकॉल में बदलाव के बाद मरीज जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं। मृत्यु दर भी घटी है।

डॉ. नागराज ने बताया कि मौत की वजह खंगाली कई तो पता चला कि बड़ी संख्या में मरीज गंभीर अवस्था में आने के बाद भर्ती किए गए। यह सिलसिला अब भी जारी है। बीते कुछ दिनों में अंतिम समय में निजी से सरकारी अस्पताल रेफर किए जाने वाले बेहद गंभीर मरीजों की सं या बढ़ी है। मृत अवस्था में भी कई मरीज अस्पताल लाए गए हैं। कुछ मरीजों की मौत भर्ती होने के चंद घंटों में भी हुई है। उन्होंने बताया कि गत सप्ताह ऐसे सात मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से दो मरीजों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था और तीन मरीजों ने भर्ती होने के दो घंटे में दम तोड़ दिया।

Nikhil Kumar Reporting
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