सफल समाज के लिए सेवाभावना जरूरी: आचार्य देवेंद्रसागर

भारत में सेवा परमोधर्म के ऊपर विचार रखते हुए आचार्य देवेंद्रसागर ने कहा कि केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही देश सेवा के लिए संकल्पित नहीं है, बल्कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है किसी न किसी रूप में अपनी मातृभूमि, जन्मभूमि एवं कर्मभूमि की सेवा करे।

By: Santosh kumar Pandey

Published: 27 Mar 2020, 07:27 PM IST

बेंगलूरु. भारत में सेवा परमोधर्म के ऊपर विचार रखते हुए आचार्य देवेंद्रसागर ने कहा कि केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही देश सेवा के लिए संकल्पित नहीं है, बल्कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है किसी न किसी रूप में अपनी मातृभूमि, जन्मभूमि एवं कर्मभूमि की सेवा करे। सेवा के विभिन्न आयामों में समाजिक सेवा की भी एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

सेवा भावना से ही एक सफल समाज की स्थापना हो सकती है। पूर्व में प्रत्येक मनुष्य के अंदर सेवा की अटूट भावना रहती थी। आज उसमें धीरे-धीरे गिरावट आ रही है। यही कारण है कि परिवार तथा समाज लगातार टूटता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग परोपकार की भावना रखें तो न ही कोई भुखमरी से मरेगा, न ही महामारी आदी बीमारी से और न ही इलाज के बिना किसी की जान जाएगी। संकट के इस समय में देश के व्यापारी जगत, उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि अगर संभव है तो आप जिन-जिन लोगों से सेवाएं लेते हैं, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखें।

Santosh kumar Pandey Desk
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