राजस्थान से गहरा नाता है श्रवणबेलगोला का

Arvind Mohan Sharma

Publish: Feb, 15 2018 06:01:07 PM (IST)

Bengaluru, Karnataka, India
राजस्थान से गहरा नाता है श्रवणबेलगोला का

महोत्सव के दो बार मुख्य सान्निध्यकर्ता आचार्य वर्धमान सागर महाराज को महोत्सव में आने का निमंत्रण राजस्थान की धरा पर दिया था...

मुनि पूज्य सागर महाराज
श्रवणबेलगोला में महामस्तकाभिषेक महोत्सव का राजस्थान से बहुत गहरा नाता है। इसका कारण यही रहा है कि श्रवणबेलगोला जैन मठ के भट्टारक कर्मयोगी स्वस्ति श्री चारूकीर्ति भट्टारक स्वामी का पुराना रिश्ता यहां से रहा है। महोत्सव के दो बार मुख्य सान्निध्यकर्ता आचार्य वर्धमान सागर महाराज को महोत्सव में आने का निमंत्रण राजस्थान की धरा पर दिया था। उन्हें पहली बार निमंत्रण वर्ष 2006 में राजस्थान के सलूंबर में और वर्ष 2018 में आने का निमंत्रण निवाई में दिया था। दोनों बार सान्निध्यकर्ता को ससंघ श्रवणबेलगोला तक 2000 किलोमीटर तक विहार कराने का लाभ जयपुर के हुलासचंद सबलावत और कंवरीलाल काला को मिला है। इसी तरह से 2006 में अभिषेक का प्रथम कलश चढ़ाने का लाभ आर.के. मार्बल्स को मिला और अब भी यही पहला कलश चढ़ाएंगे। ऐसा पहली बार हुआ है कि राजस्थान से करीब 800 टन खाद्य सामग्री आई है। जयपुर के वीरसेवक मंडल के 100 स्वयं सेवक पिछले चार महामस्तकाभिषेक से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जयपुर के कुछ यात्री बैंगलुरू से श्रवणबेलगोला तक पदयात्रा कर पहुंच रहे हैं।

 

 

 

इस बार मस्तकाभिषेक पंच लाइन ‘सौभाग्य आपको बुला रहा है,’ भी यहीं से जन्मी है। श्रद्धालु भक्तांबर अनुष्ठान का पाठ करने राजस्थान से यहां रहे हैं। सोशल मीडिया पर श्रीफल न्यूज द्वारा हिंदी भाषा में यहां के कार्यक्रमों के सबसे अधिक समाचार दिए जा रहे हैं। वहीं जैन अंतर्मुखी डॉट वीआईएक्सएसआईपीई डॉट कॉम/बाहुबली ब्लॉग से भी अंग्रेजी और हिंदी में समाचार, आलेख एवं फोटो दिए जा रहे हैं। राजस्थान से ही महामस्तकाभिषेक के निमित्त एक आधिकारिक वेबसाइट का संचालन भी हो रहा है। त्यागियों के लिए दूध की व्यवस्था भी राजस्थान से की गई है। महामस्तकाभिषेक के लिए एक स्पेशल ट्रेन भी राजस्थान से चलाई गई है। जयपुर से महामस्तकाभिषेक को लेकर जैन कनेक्ट एप के माध्यम से ‘श्रीफल जैन आइकन’ प्रतियोगिता चलाई गई है। यह प्रतियोगिता बीते 14 जनवरी को शुरू हुई और बुधवार 14 फरवरी को इसका समापन हुआ। इसमें 10 हजार लोगों ने प्रतिदिन भाग लिया और रोज 12 विजेताओं को चांदी के सिक्के दिए गए। प्रतियोगिता का फाइनल 27 फरवरी को श्रवणबेलगोला में होगा, जिसके विजेता को रत्न जडि़त गोल्ड प्लेटेड रजत कलश दिया जाएगा।

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