विधायकों के सामने रो पड़े सिद्धू

Ram Naresh Gautam

Publish: May, 17 2018 06:41:39 PM (IST)

Bengaluru, Karnataka, India
विधायकों के सामने रो पड़े सिद्धू

गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाईं लेकिन पार्टी के इतने खराब प्रदर्शन से वे दुखी हैं

बेंगलूरु. विधानसभा चुनाव में करारी हार के एक दिन के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या विधायक दल की बैठक में ही रो पड़े। सूत्रों के मुताबिक बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई विधायकों की बैठक में सिद्धू चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर काफी भावुक हो गए। बैठक के दौरान सिद्धरामय्या ने कहा कि उन्होंने पांच साल के दौरान राज्य में स्वच्छ और प्रभावी प्रशासन दिया। गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाईं लेकिन पार्टी के इतने खराब प्रदर्शन से वे दुखी हैं। सिद्धरामय्या ने कहा कि सरकार की योजनाएं जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाई और इसके कारण अच्छा काम करने के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।

सिद्धरामय्या ने चुनावी हार का ठीकरा तो किसी पर नहीं फोड़ा लेकिन पार्टी को दुबारा सत्ता में नहीं ला पाने पर अफसोस जताते हुए कहा कि अच्छा काम करने के बावजूद हम हार गए। सिद्धू के साथ ही उनके करीबी और कुछ अन्य वरिष्ठ विधायक भी बैठक में भावुक हो गए और उनकी भी आंखें भर आई। इस बीच, कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव में पार्टी की हार के लिए सिद्धरामय्या को जिम्मेदार ठहराया है। इन नेताओं का कहना है कि सिद्धरामय्या ने हमेशा अपने अंदाज में सरकार चलाई। साथ ही टिकट बंटवारे में उनकी मनमानी पार्टी को भारी पड़ी।


हार के लिए सिद्धू जिम्मेदार : कोलिवाड
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण सिद्धरामय्या की तानाशाही है। सिद्धरामय्या के एक पक्षीय फैसले के कारण ही कांग्रेस इस हालत में पहुंच गई है। विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष के.बी.कोलिवाड ने यह बात कही।

उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को सिद्धरामय्या पर भरोसा नहीं करना चाहिए। सिद्धरामय्या के मूल कांग्रेसी नहीं होने से उन्हें कांग्रेस के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। कांग्रेस के मूल नेताओं को कर्नाटक में कांग्रेस बचाने की पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि हावेरी जिले में रानी बेन्नूर विधानसभा क्षेत्र में अपने समुदाय के भाजपा प्रत्याशी शंकर को जिताने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने उनके खिलाफ साजिश रची। इसी कारण से उनकी यहां हार हुई है।

कोलीवाड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके क्षेत्र में चुनाव प्रचार नहीं किया था। पिछले चुनाव में भी सिद्धरामय्या ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ.जी.परमेश्वर को हरवाया था। सिद्धरामय्या के कार्यकाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा वीरप्पा मोइली की अनदेखी की गई, जो अब कांग्रेस को महंगी साबित हो रही है। कोलीवाड़ हावेरी जिले के रानीबेन्नूर से चुनाव हार गए हैं। कोलीवाड़ को क्षेत्रीय पार्टी केपीजेपी के उम्मीदवार आर. शंकर ने हराया था।

गौरतलब है कि मंत्री पद के दावेदार रहे कोलीवाड़ को कांग्रेस ने कागोडु तिमप्पा को मंत्री बनाए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष बनाया था। जनता दल ध से 2006 में कांग्रेस आए सिद्धरामय्या के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोलीवाड वरिष्ठता के आधार पर मंत्री पद के दावेदार थे।

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