पापी व्यक्ति कलह में रुचि रखता है

डॉ. समकित मुनि ने कहा धर्मसभा में

By: Yogesh Sharma

Published: 14 Jun 2020, 02:52 PM IST

बेंगलूरु. श्वेताम्बर स्थानकवासी बावीस सम्प्रदाय जैन संघ गणेशबाग में विराजित श्रमण संघीय डॉ. समकित मुनि ने कहा कि पाप को जितना छिपाया जाता है, वह उतना ही बढ़ता है और व्यक्ति पुण्य को भी जितना छिपाता है, उतना ही पुण्य बढ़ता जाता है। पाप कार्य करने के बाद व्यक्ति छल कपट और झूठ से यदि उसे छिपाने का प्रयास करता है, तो राई जितना पाप पहाड़ बन जाता है। इसी प्रकार पुण्य को भी छिपाते हैं, थोड़ा सा अच्छा कार्य करके उसका ढिंडोरा नहीं पीटते तो हमारा पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
मुनि ने कहा कि पाप की आलोचना होनी चाहिए तभी हमारा सम्यकत्व सुरक्षित रह सकता है, जिसे पाप करने में आनंद आता है। वह परमात्मा का भक्त नहीं हो सकता क्योंकि भक्त को पाप अच्छा नहीं लगता। जो अपने जीवन में धर्म को जीवंत करता है। वह समय आने पर जयवंत बनता है। पाप कार्य से दूरी बना कर चलने वाला ही धर्म के राह पर कदम बढ़ा सकता है। पापी व्यक्ति धर्मात्मा नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि पाप पर विजय प्राप्त करने की अपेक्षा धर्म करते हुए कुर्बान हो जाना बढिय़ा है। आत्मगुणों के विकास के लिए पाप का त्याग परमावश्यक है। पापी व्यक्ति कलह में रुचि रखता है।
इस दुनिया में पाप से जोडऩे वाले हर मोड़ पर मिल जाएंगे परन्तु धर्म से जोडऩे वाले विरले ही मिलते हैं। हम जैसा किसी के साथ व्यवहार करते हैं। वह लौटकर हमारे पास ही आता है। पाप के सम्बन्ध जोड़ोगे तो पाप पुन: लौटकर तुम्हारे पास आएगा। किसी को जोडऩा हो तो धर्म से जोड़ों पाप से नहीं। धर्मात्मा ही पुण्य को एकत्र करता है। जयवंत मुनि ने प्रभु भक्ति भजन प्रस्तुति किया। संघ अध्यक्ष लालचंद मांडोत ने सभी का स्वागत किया और सुनील सांखला जैन ने धर्मसभा का संचालन एवं सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संघ के प्रकाशचंद मांडोत, सुरेशचंद चोरडिय़ा, त्रिलोक कटारिया, सम्पतराज मांडोत उपस्थित थे।

Yogesh Sharma Reporting
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