अत्याधिक मरीजों वाले कर्नाटक के छह जिलों ने बढ़ाई चिंता

- केंद्र सरकार की विशेष नजर
- बैठकों का दौर जारी

By: Nikhil Kumar

Published: 15 Sep 2020, 07:04 PM IST

बेंगलूरु. केंद्र सरकार कोविड के सबसे ज्यादा मरीजों वाले कर्नाटक के छह जिलों पर विशेष नजर (Six Karnataka districts with high cases on Centre’s watch) बनाए हुए है। इनमें बेंगलूरु शहरी जिला, दावणगेरे जिला, कोप्पल जिला, बल्लारी जिला, दक्षिण कन्नड़ जिला और मैसूरु जिला शामिल हैं। संक्रमण दर, एक्टिव मामले और मृत्यु दर की समीक्षा कर इनसे निपटने की विशेष रणनीति पर काम जारी है। वेंटिलेटर, आइसीयू और ऑक्सीजन की आपूर्ति से लेकर अस्पतालों में उपलब्ध अन्य सुविधाओं को दुरुस्त करने की योजना है।

बेंगलूरु के बाद मैसूरु जिला सर्वाधिक प्रभावित
स्वास्थ्य आयुक्त पंकज कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार के साथ समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। गत बैठक में छह जिले चिह्नित किए गए हैं। इन जिलों में बड़े पैमाने पर जांच भी जारी है। निजी व सरकारी अस्पताल प्रमुखों के साथ नियमित विडियो कॉन्फ्रेन्सिंग जारी है। दक्षिण कन्नड़ जिले में वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाई गई है। गत कुछ सप्ताह में बेंगलूरु शहरी जिले के बाद मैसूरु जिले में मरीजों की संख्या अधिक रही है। मैसूरु जिले में मरीजों की कुल संख्या 25 हजार के पार पहुंच चुकी है। सात हजार से ज्यादा मरीज उपचाराधीन हैं और 591 से ज्यादा मरीजों को बचाया नहीं जा सका है। मृत्यु दर 2.2 प्रतिशत है जो प्रदेश में औसतन मृत्यु दर 1.6 प्रतिशत से ज्यादा है।

प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी
पांडे ने बताया कि गर्भवती महिलाओं, अन्य बीमारियों से पीडि़त वरिष्ठ नागरिकों, क्षय रोग व एचआइवी-एड्स के मरीजों को संक्रमण से बचाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मचारी इनके स्वास्थ्य पर नजर रख रहे हैं लेकिन विभाग को प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी से जूझना पड़ रहा है। एक वर्षीय अनिवार्य सेवा के तहत मेडिकल के करीब 900 स्नातकोत्तर विद्यार्थी जल्द ही सहयोग के लिए उपलब्ध होंगे। नर्सिंग विद्यार्थियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आइसीयू प्रबंधन में खामियां
उत्तर कर्नाटक के चिकित्सक कुछ और कारणों से चिंतित हैं। होम आइसोलेशन वाले मरीज खुद से भी दवा लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। हालात खराब होने पर अंमित समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं। कोप्पल के एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार आइसीयू प्रबंधन में खामियां हैं। मृत्यु दर बढऩे का यह एक बड़ा कारण है। कई चिकित्सक उपचार के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों को रोजाना 12-14 घंटे काम करना पड़ रहा है।

मृत्यु दर कम करना जरूरी
कुछ चिकित्सकों के अनुसार मामले बढऩे का मतलब है कि क्लस्टर या कंटेनमेंट जोनों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। संक्रमितों की संख्या कम करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है मृत्यु दर कम करना।

Nikhil Kumar Reporting
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