मंत्रिमंडल की बैठक: उत्तरी जिलों मेंं स्थानांतरित होंगे नौ सरकारी दफ्तर

मंत्रिमंडल की बैठक: उत्तरी जिलों मेंं स्थानांतरित होंगे नौ सरकारी दफ्तर

Kumar Jeevendra Jha | Publish: Sep, 07 2018 09:01:12 PM (IST) Bengaluru, Karnataka, India

सरकारी दफ्तरों को किन-किन जिलों में स्थानांतरित किया जाएगा, इसके बारे में अभी निर्णय नहीं लिया गया है

बेंगलूरु. बजट में उत्तरी जिलों की उपेक्षा के आरोपों और अलग उत्तर कर्नाटक की मांग को लेकर उपजे विवाद के बाद सरकार ने लोगों की नाराजगी को दूर करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के वादे के मुताबिक सरकार ने नौ सरकारी दफ्तरों को बेंगलूरु अथवा दूसरे जिलों से उत्तरी जिलों में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, सरकार ने जिन कार्यालयों को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है उन्हें प्रारंभिक विभाग माना जाता है लेकिन ये सभी उत्तर कर्नाटक के मसले से जुड़े हैं।
कुमारस्वामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद विधि मंत्री कृष्णा बैरेगौड़ा ने कहा कि एक निगम को छोड़कर बाकी सरकारी दफ्तरों को किन-किन जिलों में स्थानांतरित किया जाएगा, इसके बारे में अभी निर्णय नहीं लिया गया है। इसके लिए एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति की गठित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने जिन निगमों व विभागों के केंद्रीय कार्यालयों को उत्तरी जिलों में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है उसमें कृष्णा भाग्य जल निगम, कर्नाटक नीरावरी निगम, गन्ना विकास निदेशालय, पावरलूम विकास निगम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य मानवाधिकार आयोग के एक सदस्य और राज्य सूचना अधिकार आयोग के दो सदस्यों के कार्यालय के साथ ही प्राचीन कलाकृति संग्रहालय को भी स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने उत्तर कर्नाटक के लिए अलग जलापूर्ति निगम के गठन के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया। राज्य शहरी जलापूर्ति व डे्रेनेज बोर्ड को विभाजित कर अब उत्तर कर्नाटक शहरी जलापूर्ति व डे्रेनेज बोर्ड बनाया जाएगा। इन दफ्तरों के स्थानांतरण की सिफारिश मुख्य सचिव टी एम विजय भास्कर की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी। मंत्री ने कहा कि कार्यालय स्थानांतरण के लिए गठित किए जाने वाले मंत्रिमंडलीय उपसमिति के सदस्यों के बारे में निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे। उन्होंने कहा कि उपसमिति के रिपोर्ट देने के लिए अभी कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने उपसमिति को उन अन्य विभागों व निगमों को भी चिहिन्त करने के लिए अधिकृत किया है जिनके दफ्तर को उत्तरी जिलों में स्थानांतरित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह विषय बैठक की कार्यसूची में शामिल नहीं था लेकिन मुख्य सचिव द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर यह निर्णय किया गया है।
गौरतलब है कि भाजपा कुमारस्वामी सरकार पर उत्तरी जिलों की उपेक्षा का आरोप लगाती रही है। १० सितम्बर से कुमारस्वामी की प्रस्तावित पांच दिवसीय उत्तर कर्नाटक यात्रा से पहले सरकार ने दफ्तरों के स्थानांतरण के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी देकर नाराजगी दूर करने की कोशिश की है।

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