थूकने का मतलब है बीमारी फैलाना

  • महिलाओं ने शुरू किया ‘स्टॉप इंडिया स्पीटिंग’ अभियान
  • बढ़ रही है ‘ब्यूटीफुल बेंगलूरु, ब्यूटीफुल इंडिया’ के समर्थकों की संख्या

By: Santosh kumar Pandey

Published: 02 Sep 2020, 10:37 PM IST

बेंगलूरु. कितना अजीब और गंदा लगता है जब कोई कहीं भी थूक देता है। यह असभ्य होने की निशानी तो है ही, एक नागरिक के रूप में हमारे दायित्व पर प्रश्नचिन्ह लगता है और इससे बीमारी भी फैलती है। विशेषकर, कोरोना महामारी के समय में जब लोग बीमारी से बचने के लिए मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग कर रहे हैं, ऐसे में तो थूकने की आदत से बाज आना ही चाहिए। क्योंकि थूकने का मतलब है बीमारी फैलाना।

बीमारी फैलानेवाली इस आदत के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रखा है ‘ब्यूटीफुल बेंगलूरु, ब्यूटीफुल इंडिया’ ने। वर्ष 2016 में बेंगलूरु में ओडेट कट्रक और अपर्णा नामक दो महिलाओं ने सोचा कि बेंगलूरु को क्लीन, ग्रीन एंड सेफ बनाए रखने के लिए भाषणबाजी या चर्चा करने के बजाय जमीनी स्तर पर कुछ करना चाहिए।

सरकार को दोष देने के बजाय नागरिक अपना दायित्व निभाएं। इसी सोच से अस्तित्व में आई संस्था ब्यूटीफुल बेंगलूरु, ब्यूटीफुल इंडिया से लोग जुड़ते गए और आज इस संस्था से देश के कई हिस्सों में लोग स्वैच्छिक रूप से जुड़ चुके हैं। पहले तो लोगों को प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कचरा कम करने के लिए, गंदगी नहीं फैलाने के लिए जागरूक किया गया फिलहाल थूकने से बाज आने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

यहां थूकना मना है
कट्रक कहती हैं, सरकार ने कोरोना के समय में भी थूकने से बचने पर जोर नहीं दिया। हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा कि इस पर सजा होनी चाहिए। जो लोग नहीं थूकते वे उन लोगों को जागरूक करें, जो थूकते हैं। ऐसा करना कोविड रोकने के लिए बेहद जरूरी है। हम लोगों को थूक और वायरस का संबंध बता रहे हैं। हम घरों के बाहर बोर्ड लगा रहे हैं कि यहां थूकना मना है। डॉ. देवी शेट्टी, पुनीत राजकुमार, पुलिस आयुक्त कमल पंत जैसी हस्तियां इसका समर्थन कर रही हैं। बीबीएमी भी जुर्माना लगा रही है। हम चाहते हैं लोग खुद अनुशासित हों और थूकने से बाज आएं।

सदस्य चारू शर्मा बताती हैं कि जागरूकता फैलाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों से सम्पर्क किया जा रहा है। कहीं कोई उत्सव हो तो लोगों को कचरे के प्रति जागरूक करते हैं, खरीदारी के लिए कपड़े के बैग लेकर निकलने का अनुरोध किया जाता है। लोग जुड़ रहे हैं।

img-20200901-wa0019.jpg

लोग मानते हैं कि चलता है
वे कहती हैं, थूकने के बारे में लोग ध्यान नहीं देते। लोग मानते हैं कि चलता है। कोई टोकता नहीं। कोविड के समय से जब पता चला कि थूक से ही कीटाणु फैल रहे हैं तो लोग थोड़ा सावधान हुए लेकिन आदत जाते-जाते जाती है। इस अभियान से विद्यार्थी भी जुड़े हैं। हम पोस्टर बनाते हैं, जो सोशल मीडिया पर साझा होता है। आसपास की दुकानों के पास नो स्पीटिंग के प्रिंट लगा रहे हैं। अच्छा रेस्पांस मिलता है। नो स्पीटिंग का पोस्टर लगाया गया। लोगों का समर्थन मिला है। अलग अलग वार्डों में लोग कर रहे हैं। अलग-अलग भाषाओं में पोस्टर बनवाकर दूसरे राज्यों में भी फैलाया जा रहा है।

Santosh kumar Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned