राज्यों को बाजार से लेना पड़ रहा महंगा ऋण

पिछले साल से 33% ज्यादा उधार ले चुके हैं राज्य

 

By: Jeevendra Jha

Published: 28 Feb 2021, 08:46 PM IST

बेंगलूरु. कोरोना से उपजे हालात के कारण राज्यों को न सिर्फ व्यय को पूरा करने के लिए बाजार से अधिक उधार लेना पड़ रहा है बल्कि इसके लिए अधिक ब्याज भी चुकाना पड़ रहा है। इस सप्ताह कर्नाटक सहित 17 राज्यों ने बाजार से 23,806 करोड़ रुपए जुटाए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के दौरान 28 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश बाजार से 6.90 लाख करोड़ रुपए का उधार ले चुके हैं, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 33 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान इस अवधि में राज्यों ने 5.18 लाख करोड़ का ऋण लिया था। राज्य इस साल तय कार्यक्रम के मुताबिक 84 फीसदी ऋण ले चुके हैं। इस साल हर सप्ताह राज्यों ने करीब 14,584 करोड़ रुपए का ऋण लिया।
राज्यों के राजस्व आय में लॉकडाउन के कारण कमी और ऋण का बोझ बढऩे के साथ ही लागत भी बढ़ रही है। राज्य विकास ऋणों (एसडीआर) की बोली में इस बार परिपक्वता दर पिछले 11 महीने में सर्वाधिक रही। राज्यों के खुले बाजार से लिए जाने वाले ऋणों की लागत में पिछले ६ सप्ताह से वृद्धि का दौर जारी है। आरबीआइ के सरकारी प्रतिभूति के तौर पर नीलाम किए जाने वाले 10 साल के बांड की परिपक्वता दर को 6 प्रतिशत के दायरे में रखने की कोशिश के बावजूद राज्यों की लागत बढ़ रही है। 23 फरवरी की बोली में ऋणों के लिए औसत ब्याज दर 7.19 प्रतिशत रही जो एक सप्ताह पहले के 7.01 प्रतिशत की तुलना में 18 आधार अंक ज्यादा है।

विश£ेषकों का कहना है कि सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशकों के कम रुचि लेने और अधिक अनुपात में ऋण पत्र उपलब्ध होने के कारण ब्याज दरों में वृद्धि हो रही है। जानकारों का कहना है कि केंद्र और राज्यों के बजट में वित्तीय घाटे के अनुमानों को देखते हुए अगले साल भी राज्यों के बड़े पैमाने पर बाजार से ऋण लेने की संभावना है। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 80 हजार करोड़ रुपए और उधार लेने की घोषणा की है, इसके साथ ही केंद्र का ऋण बढ़कर 13.9 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। अगले सप्ताह १३ राज्य बाजार से 23 हजार करोड़ रुपए उधार लेने की तैयारी में हैं।
6 राज्यों ने लिए 53% कर्ज
आंकड़ों के मुताबिक राज्यों के कुल ऋण का 53 प्रतिशत सिर्फ छह राज्यों- तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश ने लिए हैं। मध्य प्रदेश ने अभी तक पछले साल की तुलना में 133 प्रतिशत ज्यादा ऋण लिया है जबकि राजस्थान ने 58, महाराष्ट्र ने 52, तेलंगाना ने 46, कर्नाटक ने 43, आंध्र प्रदेश ने 36 और तमिलनाडु ने 35 प्रतिशत ज्यादा ऋण लिए हैं। गुजरात और मणिपुर ने पिछले साल की तुलना में 2 फीसदी कम ऋण लिए हैं। ओडिशा ने 45, त्रिपुरा ने 27 और अरुणाचल प्रदेश ने 14 फीसदी कम ऋण लिए हैं पिछले साल की तुलना में।

दो वित्त वर्षों में ऋण की स्थिति
राज्य 2020 2021 बदलाव प्रश
तमिलनाडु 58,890 79,500 35
महाराष्ट्र 43,498 66,000 52
कर्नाटक 42,100 60,000 43
राजस्थान 32,582 51,411 58
प. बंगाल 44,010 49,000 11
मध्य प्रदेश 15,000 35,000 133
गुजरात 33,400 32,780 (-2)
छत्तीसगढ़ 6,000 11,000 83
राशि करोड़ रुपए में, 23 फरवरी तक के आंकड़े

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