कभी नहीं चली इतनी लंबी हड़ताल

फिर भी सरकार के रवैये में कोई बदलाव के संकेत नहीं

By: Sanjay Kulkarni

Updated: 21 Apr 2021, 06:23 AM IST

बेंगलूरु. राज्य के इतिहास में पहली बार परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल इतने लंबे समय तक चली है। 7 अप्रैल से शुरू हुई यह अनिश्चितकालीन हड़ताल 13 दिन बाद भी खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
परिवहन निगम के कर्मचारी छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत वेतन वृद्धि देने पर अड़े हैं। लेकिन, राज्य सरकार ने इसे पूरा करने से स्पष्ट इनकार कर दिया और केवल 8 फीसदी वेतन वृद्धि की बात कह रही है। दोनों पक्षों के अपने रुख पर अड़े होने से यह कहना कठिन है कि हड़ताल कब खत्म होगी।
राज्य सरकार के कड़े तेवर
सरकार ने अब परिवहन निगम के कर्मचारी संघ से बातचीत से इनकार करते हुए कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बीएमटीसी के 2500 कर्मचारी समेत 4 परिवहन निगमों के 3000 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। 800 से अधिक कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया है। निगम की बस पर पथराव करने वाले कर्मचारियों पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं। सोमवार को फ्रीडम पार्क में धरना देने पहुंचे कई कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पूर्व अध्यक्ष ने हड़ताल को बताया लक्ष्यहीन
कर्नाटक राज्य परिवहन निगम कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष एचवी अनंत सुब्बराव के मुताबिक राज्य सरकार ने हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है इसलिए अब हड़ताल चलाना गलत है। इस हड़ताल की अब कोई दिशा नहीं है न कोई लक्ष्य है। इसलिए कुछ हासिल नहीं होगा। उल्टा निगम कर्मचारियों को ही अधिक नुकसान होगा।
अब जेल भरो अभियान की चेतावनी
उधर, परिवहन निगम कर्मचारी संघ के मानद अध्यक्ष कोडीहल्ली चंद्रशेखर ने कर्मचारियों की मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने के संकेत देते हुए कहा कि चारों निगमों के एक लाख कर्मचारी जेल भरो अभियान चलाने के लिए तैयार हो रहे हैं। सरकार कर्मचारियों को डराने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रही है। कर्मचारियों को निलंबित किया जा रहा है। लेकिन ऐसी कार्रवाई से कर्मचारियों पर कोई असर नहीं होगा।
निगम के कर्मचारियों की हड़ताल का इतिहास
इससे पहले 2 मई वर्ष 1977 में पहली बार राज्य के परिवहन निगम के कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। वह हड़ताल महज एक दिन चली थी। उसके पश्चात 15 जनवरी 1985 को भी एक दिन की हड़ताल हुई थी। वर्ष 1994 में 4 दिन तथा वर्ष 1995 में 5 दिन तक हड़ताल चली। वर्ष 2012 में दो दिन तथा वर्ष 2016 में तीन दिन हड़ताल चली थी। दिसम्बर 2020 की हड़ताल 4 दिन तक चली थी। लेकिन 7 अप्रैल को शुरू हुई वर्तमान हड़ताल 13 दिन पूरे कर चुकी है।
यह अब तक की सबसे लंबी हड़ताल है। इस कारण निगमों को अभी तक करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है। 100 से अधिक बसें पथराव में क्षतिग्रस्त हुई। बस पर पथराव के कारण निगम के एक चालक की मौत भी हुई है। राज्य सरकार के कड़े तेवरों के कारण निगमों के कई कर्मचारी सेवा पर लौटने लगे है। 4 निगमों की 7200 से अधिक बसें चलनी शुरु हो गई हंै। सरकार ने निजी बस मालिकों को खूली छूट दे दी है। इस कारण यह हड़ताल अब धीरे-धीरे बेअसर साबित हो रही है।

Sanjay Kulkarni Reporting
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