प्रदेश नेतृत्व एकजुट, कोई अंतर-विरोध नहीं: मोइली

प्रदेश नेतृत्व एकजुट, कोई अंतर-विरोध नहीं: मोइली

Sanjay Kumar Kareer | Publish: Apr, 23 2018 12:02:00 AM (IST) Bangalore, Karnataka, India

राज्य में कांग्रेस के पक्ष में हवा है और वह सत्ता में वापसी करने जा रही है।

बेंगलूरु. टिकट बंटवारे के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरों को खारिज करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम.वीरप्पा मोइली ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ाई में प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिरता दी है।

मोइली ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों को दरकिनार करते हुए कहा कि जिन लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, वे टिकट के प्रमुख दावेदार थे। इसलिए उनका विरोध प्रदर्शन क्षणिक है और अंतत: वे समझ जाएंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि प्रदर्शन इस बात के संकेत है कि राज्य में कांग्रेस के पक्ष में हवा है और वह सत्ता में वापसी करने जा रही है।

मोइली ने कहा कि पार्टी के भीतर कोई अंदरूनी कलह नहीं है और हाल के वर्षों में सिद्धरामय्या एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पांच साल तक एक स्थिर सरकार चलाई। पांच वर्ष में कोई आंतरिक लड़ाई नहीं थी और भविष्य में भी नहीं होगी। प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है।

इससे पहले चिक्कबल्लापुर के सांसद मोइली, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व कलबुर्गी के सांसद मल्लिकार्जुन खरगे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.जी.परमेश्वर के बारे कहा जा रहा है कि वे लंबे समय में पार्टी से जुड़े नेताओं को टिकट दिलवाने के पक्ष में थे ना कि दूसरी पार्टियां छोड़कर कांग्रेस में आए नेताओं को। लेकिन, टिकट बंटवारे में सिद्धरामय्या का वर्चस्व रहा और पार्टी बदलने वाले कई नेताओं को वे टिकट दिलवाने में कामयाब रहे।

कांग्रेस घोषणापत्र समिति के चेयरमैन मोइली ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी को घोषणा पत्र का मसौदा सौंप दिया है। अंतिम मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे जल्दी ही जारी किए जाने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी और वह जीत नरेंद्र मोदी के पतन की शुरुआत होगी। सिद्धरामय्या के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर नहीं है लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ महौल है। आधे-अधूरे जीएसटी कानून के चलते वित्तीय स्थिति खराब है। विमौद्रीकरण और बैंकों को जिस ढंग से चलाया गया, उससे हालात और खराब हुए। ये सभी कारक लोकसभा चुनावों में मोदी के खिलाफ जाएंगे। राहुल गांधी ने खुद को नरेंद्र मोदी से बेहतर साबित किया है और अन्य राजनीतिक दल भी इसे महसूस करेंगे।

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