उत्तर कर्नाटक के सभी बांधों के जलस्तर पर निगरानी

जलसंसाधन मंत्री ने किया सचेत

By: Sanjay Kulkarni

Published: 24 Jun 2020, 05:40 PM IST

बेंगलूरु. वर्ष 2018 तथा वर्ष 2019 जैसे बाढ़ के हालातों की पुनरावृत्ति न हो इसलिए जलसंसाधन मंत्री रमेश जारकीहोली ने उत्तर कर्नाटक के बेलगावी, रायचूर, कलबुर्गी, बागलकोट, विजयपुरा तथा यादगिर जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर सतर्कता बरतने के साथ इन जिलों के सभी प्रमुख बांधों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।जलसंसाधन मंत्री रमेश जारकीहोली के मुताबिक गत दो वर्ष से लगातार इस क्षेत्र में बाढ़ के कारण जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है।

महाराष्ट्र में हो रही भारी बारिश के कारण अलमत्ती समेत यहां के सभी बांधों का जलस्तर लगातार बढ़ते जा रहा है। इस बार इन सभी बांधों के जलस्तर पर निगरानी तथा बांध से पानी छोडऩे के लिए सतर्कता दल का गठन किया गया है। इस बांध के निचले क्षेत्र के निवासियों को अभी से सतर्क किया जा रहा है। साथ में महाराष्ट्र के जलसंसाधन विभाग के साथ वहां के बांधों से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा की सही जानकारी हासिल करने के लिए विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की जलसंसाधन परामर्शक समिति का भी गठन किया गया है। अलमत्ती बांध के प्रमुख अभियंता रविनंदन कुलकर्णी के मुताबिक बांध में शुक्रवार को 65 हजार क्यूसेक पानी आ रहा था। सोमवार को इस बांध में 53 हजार 631 क्यूसेक पानी आ रहा है। महाराष्ट के राजापुर बांध से पानी छोडऩे से इस बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। साथ में बेलगावी जिले के तीन बैरेज भी लबालब हो गए है।महाराष्ट्र के कोयना तथा आस-पास के क्षेत्र में अधिक बारिश होने पर बांधों से अधिक पानी छोड़ा जाएगा जिस परिणाम स्वरूप अलमत्ती बांध में अधिक पानी आने की संभावना है। हालाकि अभी कृष्णा जलबहाव क्षेत्र में बाढ़ सदृश्य हालात नहीं है।

अलमत्ती बांध में गत पांच दिनों में 5.4 टीएमसी पानी संग्रहित है। सोमवार को इस बांध का जलस्तर 513.40 मीटर तक पहुंच गया था। जबकि इस बांध की अधिकतम पानी भंडारण की क्षमता 519.60 मीटर है। इस बांध से 6 जिलों में फसलों की सिंचाई की जाती है तथा 290 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इस बांध से छोड़ा गया पानी नारायणपुरा बांध में जाता है। यहां से रायचूरु, यादगिर, कोप्पल, आदि जिलों को नहरों के जरिये सिंचाई के लिए यह पानी पहुंचाया जाता है।

कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) के निदेशक जी.एस.श्रीनिवास रेड्डी के मुताबिक बारिश के दिनों में जलसंसाधन विभाग को बांध लबालब करने के बदले उनकी भंडारण क्षमता का 70 फीसदी भंडारण ही करने के लिए कहा गया है। अक्सर बांध लबालब होने का इंतजार किया जाता है। उसके बाद ही बांध के गेट खोले जाते हंै। ऐसी स्थिति में इस बांध में अतिरिक्त पानी का भंडारण संभव नहीं होने के कारण बांध के निचले क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हंै। जलसंसाधन विभाग को इस बार ऐसी भूल नहीं करने के लिए कहा गया है। गत वर्ष अलमत्ती तथा नारायणपुरा बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने पर बाढ़ जैसे हालात पैदा हुए थे।

Sanjay Kulkarni Reporting
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